पीलीभीत , जुलाई 25 -- उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में शनिवार तड़के लगभग पांच वर्षीय एक बाघिन गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिली। वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने उसे तत्काल चिकित्सकीय निगरानी में लेकर उपचार शुरू कराया। चिकित्सकों के अनुसार बाघिन की हालत फिलहाल स्थिर है, हालांकि वह अभी भोजन करने की स्थिति में नहीं है।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नियमित गश्त के दौरान वनकर्मियों ने घायल बाघिन को देखा, जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों और रेस्क्यू टीम को मौके पर बुलाया गया। प्राथमिक जांच में आशंका जताई गई है कि बाघिन किसी अन्य बाघ अथवा वन्यजीव के साथ क्षेत्रीय वर्चस्व (टेरिटोरियल फाइट) को लेकर हुए संघर्ष में घायल हुई है। हालांकि चोटों के वास्तविक कारणों की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के उप निदेशक एवं प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने यूनीवार्ता को बताया कि बाघिन की देखभाल और निगरानी के लिए पांच सदस्यीय विशेष टीम गठित की गई है। यह टीम चौबीसों घंटे उसकी स्वास्थ्य स्थिति और गतिविधियों पर नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि वन विभाग बाघिन के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है तथा आसपास के वन क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है।
बाघिन का उपचार कर रहे पशु चिकित्सक डॉ. दक्ष गंगवार ने बताया कि उसके दाहिने कान पर गंभीर घाव था, जिसमें बड़ी संख्या में कीड़े पड़ गए थे। सभी कीड़ों को निकाल दिया गया है और घाव का उपचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सुबह के समय बाघिन की स्थिति चिंताजनक थी, लेकिन उपचार के बाद अब उसकी हालत स्थिर है।
डॉ. गंगवार ने कहा कि फिलहाल घायल बाघिन को किसी अन्य स्थान पर उपचार के लिए ले जाना संभव नहीं है। उसे ड्रिप लगाई जा रही है और सूजन में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन अभी वह कुछ भी खाने की स्थिति में नहीं है। उपचार के संबंध में कानपुर चिड़ियाघर तथा भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर (बरेली) के विशेषज्ञ चिकित्सकों से भी लगातार परामर्श लिया जा रहा है।
वन विभाग ने बताया कि घटना के बाद आसपास के जंगल में गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सके और किसी भी संभावित घटना को समय रहते रोका जा सके।
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