श्रीनगर , जुलाई 30 -- पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी ) ने पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (पीसी) के एक बड़े नेता केंद्रीय जांच एजेंसियों का नाम लेकर पीडीपी नेताओं को डरा-धमकाने का आरोप लगाते हुए गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में दखल देने की अपील की।
पीडीपी नेताओं इल्तिजा मुफ्ती, वहीद पारा और विधान परिषद के पूर्व सदस्य यासिर ऋषि ने यहां संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों को डराने-धमकाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के नामों का इस्तेमाल किया जा रहा है। गौरतलब है कि पीसी के प्रमुख विधायक सज्जाद लोन हैं।
सुश्री इल्तिजा ने आरोप लगाया कि पीसी नेतृत्व कश्मीर की राजनीति में डर का माहौल बना रहा है। उन्होंने दावा किया कि पीडीपी नेताओं को डराने के लिए केंद्रीय एजेंसियों और गृह मंत्रालय के नामों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने श्री शाह से अपील की कि वे स्पष्ट करें कि क्या केंद्र की जानकारी में ऐसी हरकतें हो रही हैं, और अगर नहीं, तो एजेंसियों के नामों का गलत इस्तेमाल करने वालों पर लगाम लगायें।
उन्होंने कहा, "हमसे बैलेट (वोट) के ज़रिए लड़िए, ईडी, एनआईए या सीबीआई के ज़रिए नहीं।" उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टियों को डराने-धमकाने के बजाय बातचीत और चुनावों के ज़रिए मुकाबला करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पीडीपी के कई नेताओं को दबाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। जांच एजेंसियां किसी राजनीतिक पार्टी या उसके नेतृत्व की निजी संपत्ति नहीं हैं।
श्री ऋषि ने आरोप लगाया कि उन्हें हाल ही में केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारियों की एक कथित बैठक के बारे में पता चला, जिसमें उन्हें निशाना बनाने पर चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि उग्रवाद या अलगाववाद से उनका कोई लेना-देना नहीं है और उन्होंने किसी को भी यह साबित करने की चुनौती दी कि वह किसी गलत काम में शामिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2019 से उन्हें उत्पीड़न और दबाव का सामना करना पड़ रहा है और मांग की कि एजेंसियां उन लोगों से सीधे पूछताछ करें या उन पर मुकदमा चलाएं जो उन पर झूठे आरोप लगा रहे हैं।
श्री पारा ने कहा कि कथित राजनीतिक दबाव, जम्मू-कश्मीर के सामने मौजूद मुख्य मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि राजनीतिक चर्चा अनुच्छेद 370, राजनीतिक कैदियों, जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध, कर्मचारियों की बर्खास्तगी और क्षेत्र के लोगों को प्रभावित करने वाले अन्य मुद्दों पर केंद्रित होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, "किन्हीं भी दो कश्मीरियों के आपस में लड़ने का कोई कारण नहीं है। असली सवाल यह है कि जम्मू-कश्मीर में सार्वजनिक चर्चा को जानबूझकर दूषित और विभाजित क्यों किया जा रहा है?"उन्होंने आरोप लगाया कि 2019 के बाद से पीडीपी के कई नेताओं (जिनमें विधायक, एमएलसी और एमपी शामिल हैं) पर पार्टी छोड़ने का दबाव डाला गया, और दावा किया कि पार्टी की राजनीतिक जगह को व्यवस्थित रूप से कमज़ोर किया गया है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों को सुलझाने के लिए राजनीतिक पार्टियों को एजेंसियों, गिरफ्तारियों, संपत्ति ज़ब्त करने या दबाव के अन्य तरीकों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, "अगर हम कश्मीर को कुछ दे नहीं सकते, तो कम से कम हमें नुकसान तो नहीं पहुंचाना चाहिए।" उन्होंने मीडिया और राजनीतिक हस्तियों से "साफ़-सुथरी और मुद्दों पर केंद्रित" चर्चा बनाए रखने का आग्रह किया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित