लखनऊ , मई 20 -- समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को भाजपा सरकार पर संवैधानिक आरक्षण को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए 'पीडीए ऑडिट' नामक दस्तावेज जारी किया। इसके कुछ ही घंटे बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने सपा पर पलटवार करते हुए अखिलेश यादव को ही पीडीए विरोधी करार दे दिया।
अखिलेश की प्रेस कांफ्रेंस के तुरंत बाद बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने कहा कि अखिलेश यादव कैसे पीडीए की बात कर सकते हैं, जबकि पीडीए का नुकसान सबसे अधिक सपा ने ही किया है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की सरकार ने एससी, एसटी और ओबीसी के बैकलॉग पदों पर भर्ती पर रोक लगाई थी। एससी समाज को ठेकेदारी में आरक्षण बसपा सरकार ने दिया था, जिसे अखिलेश सरकार ने छीन लिया।
एससी, एसटी अधिकारियों को प्रमोशन बसपा ने दिया, लेकिन अखिलेश यादव ने उनका डिमोशन कर दिया। महापुरुषों के नाम से बने जिलों का नाम बदलकर अखिलेश यादव ने दलित महापुरुषों का अपमान किया। बसपा ने कहा कि जो लोग सत्ता में रहते हुए दलित-पिछड़ों के अधिकार छीनते रहे, वे आज आरक्षण के नाम पर राजनीति कर रहे हैं।
इससे पहले पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार संवैधानिक आरक्षण प्रणाली को कमजोर कर रही है और लोगों को उनके अधिकारों के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
उन्होंने 'आरक्षण की लूट' से संबंधित पीडीए ऑडिट रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि इसमें सुधार जारी रहेगा और अधिक डेटा जोड़ा जाएगा। अखिलेश ने कहा, "अगर हमें संवैधानिक अधिकारों के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, तो इसका अभिप्राय है कि सरकार पक्षपाती है। और जो पक्षपाती है वह बेवफा भी है। पूर्वाग्रह अपने आप में अन्याय है क्योंकि यह अधिकार छीन लेता है।"उन्होंने आरक्षण को सामाजिक न्याय और समानता का जरिया बताते हुए कहा कि "आरक्षण दान नहीं है, यह एक अधिकार है।"सपा प्रमुख ने लेटरल एंट्री नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इसके जरिए अपने लोगों को पिछले दरवाजे से समायोजित कर आरक्षण की मांग को कमजोर किया जा रहा है।
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