नयी दिल्ली , जून 10 -- पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) में चल रहे आंदोलन के दौरान मंगलवार को 11 नागरिकों के मारे जाने के बावजूद दूसरे दिन बुधवार को भी बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर डटे रहे और हजारों प्रदर्शनकारियों का हुजूम रावलकोट की तरफ बढ़ गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पाकिस्तानी सेना के दमन के बाद पूरे पीओके में पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ गुस्सा बेहद बढ़ गया है। अपने राजनीतिक, आर्थिक और नागरिक अधिकारों की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों ने पीछे हटने से साफ इनकार करते हुए आंदोलन को और तेज कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, इस समय रावलकोट, बाग, हट्टियां बाला, कोटली, मीरपुर, सुधनोती, धीरकोट, डंडयाल और मुजफ्फराबाद में डेढ़ लाख से अधिक लोग प्रदर्शनों में शामिल हैं, जो हाथों में डंडे और बैनर लेकर आजादी के नारे लगा रहे हैं।

मंगलवार तक प्रदर्शनों के दौरान सेना की बर्बरता में कम से कम 41 लोगों की मौत हो गयी थी, जिनमें 19 बच्चे और सात गर्भवती महिलाएं शामिल थीं। इसके अलावा 70 से ज्यादा लोग घायल भी हुये थे।

सूत्रों के अनुसार, पूरे पीओके से प्रदर्शनकारियों के बड़े-बड़े काफिले बुधवार रात तक रावलकोट में इकट्ठा हो जाएंगे, जो इस क्षेत्र का पाकिस्तानी सरकार के विरूद्ध अब तक का सबसे बड़ा जमावड़ा होगा। रावलकोट में जुटने के बाद इन सभी प्रदर्शनकारियों की योजना एक साथ मुजफ्फराबाद की तरफ मार्च करने की है, जहाँ वे बड़ी संख्या में घेराव कर अपनी 38 मांगों को मंजूर करने का दबाव बनाएंगे।

दूसरी तरफ, सेना की इस कार्रवाई के कारण मानवीय स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। कल की गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल हुए 38 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से कइयों की हालत नाजुक बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों की मांगें मानने के बजाय पाकिस्तानी प्रशासन ने सख्ती और बढ़ा दी है, सरकार ने आंदोलन के चार मुख्य आयोजकों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर उन पर एक करोड़ पाकिस्तानी रुपये का इनाम घोषित कर दिया है।

पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस आंदोलन के मुख्य नेताओं को 'भारतीय एजेंट' कहना भी शुरू कर दिया है, जोकि निराधार है। पाकिस्तान में सेना और सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले राजनेताओं, अधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को दबाने के लिए वहां की व्यवस्था अक्सर इसी तरह के आरोप लगाती रही है, जैसा कि पिछले दिनों पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, उनके समर्थकों और क्षेत्रीय आंदोलनों के साथ भी देखा गया था।

प्रदर्शनकारियों को राजधानी मुजफ्फराबाद पहुँचने से रोकने के लिए प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में कई मुख्य सड़कों को बंद कर दिया है। गाड़ियों के काफिले को रोकने और उनकी रफ्तार धीमी करने के लिए कई मुख्य राजमार्गों और रास्तों पर बड़े-बड़े पेड़ काटकर डाल दिए गए हैं।

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