पटना , अगस्त 03 -- टना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (पीएमसीएच) में मरीजों के सर्जरी के लिए बड़ी सुविधा की शुरुआत की गयी है,जिससे अब मरीजों को सर्जरी के दौरान अधिक चीड़फाड़ करने की जरूरत नहीं होगी। पीएमसीएच के अस्पताल अधीक्षक राजीव कुमार सिंह ने कहा कि अस्पताल के गायनेकोलॉजी ऑपरेशन थियेटर ओटी में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी (लेप्रोस्कोपिक सर्जरी) का सफल शुभारंभ किया गया है। इस अवसर पर अस्पताल प्रशासन और स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की टीम ने नई लैप्रोस्कोपिक ओटी सुविधा का उद्घाटन नये बिल्डिंग में किया गया है। लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन) सर्जरी आधुनिक शल्य चिकित्सा की एक सुरक्षित और प्रभावी तकनीक है,जिसमें शरीर पर बड़े चीरे की बजाय छोटे-छोटे चीरे लगाकर ऑपरेशन किया जाता है।

इस विषय पर अधिक जानकारी देते हुए अधीक्षक राजीव कुमार सिंह ने कहा कि आमतौर बड़े सर्जरी के दौरान मरीजों को अधिक खून का नुकसान होने की शिकायत होती थी,लेकिन इस सुविधा के लागू होने से शरीर पर केवल छोटे चीरे लगाने से ब्लीडिंग की समस्या कम, ऑपरेशन के बाद दर्द कम, संक्रमण (इन्फेक्शन) का खतरा कम व मरीज जल्दी से सामान्य दिनचर्या में शीघ्र लौट सकता है।अस्पताल में कम समय तक भर्ती रहना पड़ता है। घाव जल्दी भरते हैं और निशान भी बहुत छोटे रह जाते हैं। कई मामलों में जल्दी काम पर लौटना संभव होगा। इससे मरीजों को बेहतर आराम और तेज़ रिकवरी मिलेगी।

इस व्यवस्था का संचालन अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह, प्रभारी प्राचार्य डॉ मधु सिंह व विभागाध्यक्ष डॉ.के मंजू, स्त्री व प्रसूति रोग विभाग के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। साथ ही लैप्रोस्कोपिक ओटी शुरू किया गया। वहीं डॉ. रुपम सिंह यूनिट की सह- प्राध्यापक डॉ. अमृत राय व डॉ. स्वीटी सिन्हा की टीम द्वारा लैप एवं डाई प्रक्रिया सफलतापूर्वक की गई।

अधीक्षक राजीव कुमार सिंह ने कहा कि मरीज को कम चीरा लगने से एक दिन के भीतर अपने सामान्य जीवन में लौट सकेंगे। वहीं पीएमसीएच में लैप्रोस्कोपिक ओटी की शुरुआत से स्त्री व प्रसूति रोग संबंधी जटिल ऑपरेशनों के लिए अब आधुनिक एवं सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हो गया है, जिससे बिहार के मरीजों को अत्याधुनिक सर्जिकल सुविधा का लाभ मिल सकेगा।

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