चेन्नई , जुलाई 6 -- तमिलनाडु के कड़े विरोध के बावजूद कर्नाटक सरकार द्वारा कावेरी नदी पर मेकेदातु में एक नया बांध बनाने के प्रयासों को तेज करने की रिपोर्टों के बीच, पट्टाली मक्कल काच्ची (पीएमके) के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अंबुमणि रामदास ने सोमवार को मुख्यमंत्री विजय से किसानों की आशंकाओं को दूर करने और डेल्टा जिलों के किसानों की जीवन रेखा से जुड़े इस मुद्दे पर अगली रणनीति पर चर्चा और निर्णय लेने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया।

पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. अंबुमणि ने एक बयान जारी कर कहा कि कर्नाटक सरकार मेकेदातु बांध बनाने के अपने प्रयासों को तेज कर रही है। तमिलनाडु के किसानों के बीच इस बात का डर और चिंता है कि कर्नाटक किसी भी स्थिति में नया बांध बना लेगा। इससे कावेरी सिंचाई वाले जिले रेगिस्तान में बदल सकते हैं। यह चिंताजनक है कि तमिलनाडु सरकार ने इसे रोकने के लिए राजनीतिक और कानूनी कदम नहीं उठाए।

उन्होंने कहा कि पीएमके कावेरी डेल्टा जिलों और तमिलनाडु के अन्य हिस्सों पर मेकदातु बांध बनने की स्थिति में पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लगातार उजागर करती रही है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सी.आर. पाटिल से मुलाकात कर उनसे बांध निर्माण के लिए जल्द से जल्द अनुमति देने का आग्रह किया था। उन्होंने अगले चरण में बांध बनाए जाने वाले वन क्षेत्र में निरीक्षण करने की अनुमति दे दी है।

इस बीच, प्रस्तावित बांध स्थल का दौरा करने वाले किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पाया कि कर्नाटक सरकार ने वहां सर्वेक्षण के निशान लगाकर बांध निर्माण के लिए सर्वेक्षण का काम पहले ही शुरू कर दिया है।

डॉ.अंबुमणि ने अपने 1 से 4 जुलाई तक चले चार दिवसीय जागरूकता अभियान दौरे के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्होंने बिलीगुंडलू, होगेनक्कल, पेन्नागरम, धर्मपुरी, सलेम, मेट्टूर, भवानी, इरोड, तिरुप्पुर, करूर, त्रिची, कल्लनाई, तंजावुर, कुंभकोणम, मयिलादुथुरै और पूमपुहार सहित अन्य स्थानों पर पांच लाख से अधिक किसानों और आम जनता से बातचीत की। उनकी एकमात्र मांग यह है कि सिंचाई के लिए पूरी तरह से कावेरी के पानी पर निर्भर तमिलनाडु के किसानों की आजीविका की रक्षा के लिए मेकदातु बांध को हर कीमत पर रोका जाना चाहिए।

डॉ. अंबुमणि ने कहा कि हालांकि मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की मंशा किसानों के हितों की रक्षा करने की है, लेकिन किसानों को लगता है कि उन्हें गुमराह किया जा रहा है। वे मेकेदातु बांध के खिलाफ राज्य विधानसभा में पारित प्रस्ताव में जोड़े गए उस संशोधन को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं, जिसमें कहा गया है कि मेकेदातु मुद्दे को हल करने के लिए एक नया न्यायाधिकरण गठित किया जाना चाहिए। उनका यह डर जायज था कि इससे केवल कर्नाटक को फायदा होगा।

उन्होंने कहा कि कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसान इस बात पर जोर दे रहे हैं कि तमिलनाडु सरकार को इस रणनीति को बदलना चाहिए। इस विवादास्पद मुद्दे पर विधानसभा में केवल एक प्रस्ताव पारित करने से उनके अधिकारों की रक्षा करने में मदद नहीं मिलेगी।

डॉ. अंबुमणि ने कहा कि तमिलनाडु सरकार को कर्नाटक से अधिक सक्रियता से काम करना चाहिए। उसे डेल्टा जिलों के किसानों के डर को दूर करना चाहिए और मेकेदातु विवाद पर अगले कदम पर चर्चा व निर्णय लेने के लिए तुरंत सभी दलों के नेताओं की बैठक बुलानी चाहिए।

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