चेन्नई , जुलाई 25 -- तमिलनाडु में 'पट्टाली मक्कल काची' (पीएमके) के संस्थापक डॉ. एस. रामदास (88) ने शनिवार को अपने जन्मदिन के अवसर पर राजनीति छोड़ने और 'राजनीतिक संन्यास' लेने की घोषणा के साथ ही पार्टी की कमान अपने बेटे डॉ. अंबुमणि रामदास को सौंप दी है।

डॉ रामदास ने अपने 88वें जन्मदिन पर तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले में टिंडीवनम के पास स्थित अपने थैलपुरम आवास (यहां से लगभग 125 किमी दूर) पर एक संक्षिप्त संबोधन में राजनीति से संन्यास लेने की बात कही।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, "अपने 88वें जन्मदिन के मौके पर मैं आज से राजनीतिक संन्यास ले रहा हूं। अब से मैं राजनीति पर कोई बात नहीं करूंगा... राजनीति में कोई दखल नहीं दूंगा, इसे अंबुमणि संभालेंगे।" इस दौरान उनके बेटे भी उनके साथ मौजूद थे।

सांसद श्री अंबुमणि, अपनी पत्नी सौम्या और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ चेन्नई से पिता के आवास पर पहुंचे और इस मौके पर उनका आशीर्वाद लिया। इसी दौरान रामदास ने अपने संन्यास और पार्टी की कमान बेटे अंबुमणि को सौंपने की घोषणा की।

सभी पार्टियों के नेताओं के बीच बेहद सम्मानित डॉ रामदास ने 1989 में पार्टी की स्थापना की थी। उन्होंने द्रमुक और अन्नाद्रमुक दोनों के साथ गठबंधन कर उतार-चढ़ाव के दौर में पार्टी का मार्गदर्शन किया और विधानसभा एवं लोकसभा चुनावों में उनकी जीत में अहम भूमिका निभाई। इसके साथ ही पीएमके के कई सांसद केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा भी बने।

उन्होंने सामाजिक न्याय का समर्थन करते हुए वन्नियार समुदाय के लिए आरक्षण की वकालत की और राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू करने के भी प्रबल समर्थक रहे। पिता-पुत्र की इस जोड़ी के बीच मतभेद हो गए थे और सार्वजनिक रूप से तीखी बयानबाजी हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप पार्टी दो गुटों में बंट गई थी। अंबुमणि ने एक गुट का नेतृत्व किया और हालिया विधानसभा चुनावों में अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन कर चार सीटें जीतीं, जबकि उनके पिता ने दूसरे गुट की अगुवाई की और अन्नाद्रमुक से निष्कासित नेता वी.के. शशिकला की पार्टी के साथ गठबंधन किया, लेकिन चुनावों में उन्हें कोई सफलता नहीं मिली।

हालांकि, 24 जून 2026 को थैलपुरम स्थित अपने घर पर सीनियर रामदास और उनकी पत्नी सरस्वती अम्मल की 61वीं शादी की सालगिरह के मौके पर दोनों ने अपनी 18 महीने पुरानी कड़वी लड़ाई खत्म कर ली। यह लड़ाई एक समय ऐसी स्थिति में पहुँच गई थी जहाँ से सुलह की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही थी, लेकिन उस दिन भावुक होकर गले मिलने के साथ ही सब ठीक हो गया।

पीएमके के प्रमुख परिवार में यह सुलह रामदास के थैलपुरम स्थित घर पर हुई। पूर्व केंद्रीय मंत्री अंबुमणि अपनी पत्नी सौम्या एवं तमिलनाडु विधानसभा में धर्मपुरी से विधायक और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ चेन्नई से वहाँ पहुँचे ताकि इस मौके पर उनका आशीर्वाद ले सकें।

जैसे ही अंबुमणि अपनी कार से उतरे और घर के अंदर गए, भावुक दृश्य देखने को मिला। रामदास ने अपने बेटे का गले लगाकर स्वागत किया और दोनों की आँखों से आँसू छलक पड़े। सौम्या समेत परिवार के सभी सदस्य भावुक हो गए।

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