नयी दिल्ली , अप्रैल 10 -- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारत द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

डॉ सिंह ने यहां हिंदू कॉलेज में आयोजित 'वक्तव्य 2026' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पीएफबीआर तरल सोडियम को शीतलक के रूप में उपयोग करते हुए प्लूटोनियम से ऊर्जा उत्पादन करता है, जिससे कम लागत में अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है। यह तकनीक भारत के विशाल थोरियम भंडार के उपयोग का मार्ग भी प्रशस्त करेगी और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने में सहायक होगी।

उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर जोर देते हुए कहा कि एआई अब वैकल्पिक नहीं बल्कि अनिवार्य होता जा रहा है और शासन से लेकर दैनिक जीवन तक इसका प्रभाव बढ़ेगा। उन्होंने इसे एक "सहायक उपकरण" बताते हुए कहा कि इसका उपयोग संतुलित तरीके से होना चाहिए ताकि मानवीय सोच और निर्णय क्षमता बनी रहे। स्टार्टअप इकोसिस्टम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में स्टार्टअप्स की संख्या 2 लाख से अधिक हो चुकी है, जिनमें से करीब 50 प्रतिशत टियर-2 और टियर-3 शहरों से उभर रहे हैं। यह नवाचार के लोकतंत्रीकरण और छोटे शहरों में बढ़ते अवसरों को दर्शाता है। उन्होंने स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी सकारात्मक संकेत बताया।

डॉ सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को परिवर्तनकारी बताते हुए कहा कि इससे छात्रों को विषय चुनने और बदलने की स्वतंत्रता मिली है, जिससे वे अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार शिक्षा प्राप्त कर पा रहे हैं। उन्होंने "वैभव" कार्यक्रम और "प्रतिभा सेतु" पोर्टल जैसी पहलों का भी जिक्र किया, जो भारतीय वैज्ञानिकों और युवाओं को नए अवसरों से जोड़ने में मदद कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ये पहलें वैश्विक विशेषज्ञता को भारत के विकास में शामिल करने का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं।

केंद्रीय मंत्री ने छात्रों से संवाद के दौरान उनके मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आज के दौर में विकास के लिए सहयोग और नई सोच जरूरी है। उन्होंने युवाओं को पारंपरिक करियर विकल्पों से आगे बढ़कर नई संभावनाओं को तलाशने और तकनीक का प्रभावी उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।

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