पिथौरागढ़ , अक्टूबर 19 -- उत्तराखंड के सीमांत पिथौरागढ़ के दौरे पर आये भारत सरकार के दो सचिवों ने सोमवार कोकोल्डवॉटर फिशरीज क्लस्टर की समीक्षा के साथ ही पूर्व सैनिकों और वीर नारियों से भेंटवार्ता कर 14 वीर नारियों को सम्मानित किया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय, मत्स्यपालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट पिथौरागढ़ में कोल्डवॉटर फिशरीज क्लस्टर की समीक्षा बैठक हुई। इसमें ट्राउट मत्स्य पालकों, उत्तराखंड शासन के मत्स्य विभाग, आईसीएआर-शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान निदेशालय (डीसीएफआर) भीमताल, नाबार्ड, राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) और समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) के प्रतिनिधियों ने भौतिक और वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।

डॉ. लिखी ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र रेनबो ट्राउट जैसी उच्च मूल्य वाली मछलियों के उत्पादन के अनुकूल हैं। इस क्षेत्र के व्यवस्थित विकास के लिए केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के पिथौरागढ़, हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग और लद्दाख के कारगिल में कोल्डवॉटर फिशरीज क्लस्टर अधिसूचित किए हैं।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत इन राज्यों में 5,600 से अधिक रेसवे, 54 हैचरी, 293 कोल्ड स्टोरेज और 260 फीड मिल स्वीकृत किए गए हैं। सचिव ने बताया कि पिछले एक दशक में ट्राउट उत्पादन करीब छह गुना बढ़ा है और वार्षिक उत्पादन लगभग 5,000 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है।

बैठक में बताया गया कि पर्वतीय राज्यों में रेसवे, हैचरी, फीड सिस्टम, कोल्ड स्टोरेज और फसलोपरांत ढांचे के लिए 2,299 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ है। उत्तराखंड में बीते छह वर्षों में 317 करोड़ रुपये निवेश किए गए हैं। राज्य में 1,638 रेसवे, 10 हैचरी और प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित हुई हैं, साथ ही मत्स्य उत्पादों के विपणन के लिए आईटीबीपी के साथ बाजार संपर्क विकसित किया गया है।

केंद्रीय सचिव ने मत्स्य बीज, फीड की उपलब्धता, उत्पादन क्षमता और शीत शृंखला से जुड़ी चुनौतियों पर विशेष ध्यान देने को कहा। इनके समाधान के लिए मिनी हैचरी, फीड मिल, रेफ्रिजरेटेड वैन, कोल्ड स्टोरेज और रोग निगरानी प्रयोगशालाओं की स्थापना तथा तकनीकी सहायता मजबूत करने पर जोर दिया गया। उन्होंने पीएमएमएसवाई, मत्स्यपालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि (एफआईडीएफ) और राज्य सरकार की ट्राउट प्रोत्साहन योजना के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई।

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