पुष्पांकर गुप्ता सेभागलपुर , अगस्त 06 -- मुजफ्फरपुर के रहने वाले श्रद्धालु मिथिलेश कुमार ने पिछले साल श्रावणी मेले में देवघर में बसे बाबा वैद्यनाथ से पुत्र नहीं एक पुत्री मांगी थी और कहा था कि मन्नत पूरी होगी तो वह दंडवत यात्रा करेंगे और इस बार वह जमीन पर लेटते हुए बाबा के दर्शन के लिए निकल पड़े हैं।

एक पिता साथ चल रही अपनी दो माह की नन्हीं परी जैसी पुत्री को फूलों से सजी डाली में निहार लेता है और सुल्तानगंज, कटोरिया, देवघर कच्चे कांवरिया मार्ग पर हर कदम जमीन पर लेटता हुआ आगे बढ़ रहा है, उसे तो देवघर के बाबा वैद्यनाथ का शुक्रिया अदा करना है। मिथिलेश अपने आराध्य बाबा के आशीर्वाद से अभिभूत सुल्तानगंज से देवघर तक सैकड़ो किलोमीटर का सफर ऐसे ही तय करेगा।

मिथिलेश ने यूनीवार्ता को बताया कि पिछले वर्ष जब वह कांवर यात्रा करते हुए देवघर स्थित बाबा के दरबार पहुंचे थे, तब उनके मन में एक ही इच्छा थी, "बाबा उन्हें एक पुत्री से नवाज दे। उस समय उन्होंने खुद से एक प्रतिज्ञा ली और बाबा के सामने हाथ फैला कर कहा, "अगर मेरी झोली पुत्री से भर गई, तो अगले सावन मास में मैं पुत्री को अपने साथ लेकर दंडवत यात्रा करते हुए आपके (बाबा)दरबार आऊंगा।"श्री कुमार कहते हैं कि इसके बाद बाबा भोलेनाथ की असीम कृपा से उनके घर नन्हीं परी जैसी पुत्री ने जन्म लिया। बहुतों के लिए यह एक संयोग होगा लेकिन एक पिता के लिए यह भोलेनाथ का आशीर्वाद है। इसलिए श्री कुमार इस बार श्रावणी मेले में बाबा से अपना वादा निभाने निकल पड़े हैं और हर दंडवत के बाद पहले बेटी को देखते हैं, फिर भोलेनाथ को याद करते हैं।

बाबा नगरी तक की यह दंडवत यात्रा आसान नहीं होती। पूरे शरीर को जमीन पर टिकाकर हर कदम लेटना, फिर आगे बढ़ना पड़ता है, लेकिन मिथिलेश के चेहरे पर थकान का नामोनिशान नही है।

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