नयी दिल्ली , फरवरी 16 -- नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने सोमवार को कहा कि भारतीय नौसेना ने पिछले वर्ष उच्च स्तर की संचालन सक्रियता बनाए रखी और वह हिन्द प्रशांत क्षेत्र और उससे आगे महत्वपूर्ण मिशन पर तैनात रही हैं। उन्होंने कहा कि नौसेना प्लेटफॉर्म ने समुद्र में लगभग 11,000 शिप-डे और 50,000 से अधिक उड़ान घंटे पूरे किए जो भारत की बढ़ती पहुंच और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर राष्ट्रीय हितों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
नौसेना प्रमुख ने यहां नेशनल मेरिटाइम फाउंडेशन द्वारा आयोजित 'वाइस एडमिरल के.के. नय्यर स्मृति व्याख्यान-2026' में कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय नौसेना की त्वरित तैनाती, आक्रामक गति, क्षेत्र पर समग्र दृष्टि और अन्य सेनाओं के साथ विश्वसनीय स्ट्राइक क्षमता ने पाकिस्तान को घुटने टेकने के लिए बाध्य किया।
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय नौसेना की सेवा दो स्तंभों "गार्डियनशिप, जो वर्तमान को सुरक्षित करती है, और स्टुअर्डशिप, जो भारत के समुद्री भविष्य को तैयार और आकार देती है पर आधारित है।
गार्डियनशिप के विचार को समझाते हुए उन्होंने जनरल सर जॉन हॅकेट के कथन का हवाला दिया "सैन्य जीवन का मूल आधार असीमित जिम्मेदारी के तहत बल का सुव्यवस्थित प्रयोग है," और यह "असीमित जिम्मेदारी" उन लोगों को परिभाषित करती है जो वर्दी चुनते हैं, और नौसेना कर्मियों के लिए यह "समुद्र में निहित" होती है।
उन्होंने कहा कि नौसेना भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, राष्ट्रीय हितों की रक्षा और समुद्र से या समुद्र पर होने वाले खतरों को "कहीं भी, कभी भी, किसी भी रूप में" रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।
एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि नौसेना समावेशी समुद्री दृष्टिकोण को भी आगे बढ़ा रही है, जिसमें पिछले सप्ताह कंबाइंड टास्क फोर्स 154 का नेतृत्व शामिल है। उन्होंने कहा, "यह भारत के लिए ऐतिहासिक पहला अवसर है, जहां हम बहु-राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण और क्षेत्रीय सहयोग ढांचे का नेतृत्व करेंगे, और वैश्विक सुरक्षा साझेदार के रूप में हमारी बढ़ती भूमिका को सुदृढ़ करेंगे।"नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय नौसेना निर्णायक समुद्री बदलाव के दौर में तेजी से आगे बढ रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में विशाखापट्टनम में 70 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, जहाज और विमान "वैश्विक समुद्री सहभागिता के ऐतिहासिक अवसर " के लिए एकत्र होंगे। इनमें नौसेना के तीसरे अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा निरीक्षण , 13 वें बहु-राष्ट्रीय मिलन अभ्यास श्रृंखला, और 9वीं इंडियन ओशन नेवल सिंपोजियम की अध्यक्षीय बैठक शामिल हैं।
इन सहभागिताओं को "समुद्र पर सेवा का दृश्यमान रूप" बताते हुए, उन्होंने कहा कि यह भारत की उपस्थिति, मुद्रा और साझेदारी को दर्शाती हैं, और इसे "गार्डियनशिप" का रूप कहा जा सकता है।
उन्होंने कहा, "यदि गार्डियनशिप वर्तमान को सुरक्षित करती है, तो स्टुअर्डशिप भविष्य को तैयार करती है," और नौसेना भारत को मजबूत और सक्षम समुद्री राष्ट्र बनाने में "शांत लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका" निभा रही है। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य और समृद्धि अब "समुद्र से, समुद्र पर और समुद्र द्वारा" संचालित होगी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित