, Sept. 10 -- राज्यसभा सांसद ने कहा कि जदयू के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार पिछले 15 वर्षों से लगातार इस मुद्दे को मजबूती और बेबाकी से उठाते रहे हैं तथा उन्होंने कभी बिहार के हितों से समझौता नहीं किया। आज जदयू भी उसी नीति और सोच के साथ बिहार के जल हितों की आवाज मजबूती से उठा रहा है।

राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 1996 में जब बिहार में राजद की सरकार थी, उस समय बिहार के हितों की अनदेखी करते हुए फरक्का जल संधि हुई, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री ने बिहार के हित में इसके विरोध में एक शब्द तक नहीं कहा। आज वही लोग इस मुद्दे पर मुखर हो रहे हैं।

श्री झा ने कहा कि जदयू ने हाल में विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सदन में इस विषय को मजबूती से उठाया था। इसके जवाब में विदेश मंत्री ने पत्र के माध्यम से सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए बिहार के हितों को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया है। यह स्वागतयोग्य है, लेकिन बिहार के हितों की सुरक्षा के लिए ठोस नीति और स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है।

जदयू नेता ने कहा कि राज्य में नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं और सरकार डाटा सेंटर स्थापित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में औद्योगिक विकास के साथ पानी की जरूरत बढ़ेगी। वहीं, बढ़ती आबादी के कारण पेयजल की मांग भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में फरक्का जल संधि को लेकर जदयू का स्पष्ट मत है कि इसका नवीनीकरण नहीं किया जाना चाहिए। यदि किसी परिस्थिति में इसका नवीनीकरण होता भी है, तो वर्ष 2050 तक बिहार की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, जिससे राज्य के हित प्रभावित नहीं हों।

संवाददाता सम्मेलन में बिहार सरकार के मंत्री मदन सहनी, मुख्य प्रवक्ता एवं विधान पार्षद नीरज कुमार, विधान परिषद में सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी , प्रदेश महासचिव सह मुख्यालय प्रभारी अंजुम आरा तथा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. अनुप्रिया और चंदन कुमार सिंह उपस्थित थे।

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