नयी दिल्ली , जनवरी 28 -- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को कहा कि माओवाद के खिलाफ सरकार की नीतियों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से पिछले एक साल में करीब दो हजार लोग माओवाद का रास्ता छोड़कर मुख्य धारा में लौटे हैं।
श्रीमती मुर्मु ने बजट सत्र के पहले दिन संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की नीतियों के अनुरूप सुरक्षा बलों ने 'माओवादी आतंक' पर भी निर्णायक कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक देश के 126 जिलों में असुरक्षा, भय और अविश्वास का वातावरण था। माओवादी विचारधारा ने कई पीढ़ियों का भविष्य अंधकार में डाल दिया था। इसका सबसे अधिक नुकसान युवाओं, आदिवासी और दलितों को हुआ है।
उन्होंने कहा, " आज माओवादी आतंक की चुनौती 126 जिलों से घटकर आठ जिलों तक सीमित हो गयी है। इनमें भी तीन ही जिले गंभीर रूप से प्रभावित हैं। पिछले एक साल में माओवाद से जुड़े लगभग दो हजार लोगों ने आत्मसमर्पण किया है।"माओवाद से मुक्त हुए जिलों में विकास का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि जब बीजापुर के गांव में 26 साल बाद बस पहुंची, तो लोगों ने उत्सव मनाया। बस्तर ओलंपिक में युवा बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। हथियार छोड़ चुके लोग आज जगदलपुर के पंडुम कैफे में लोगों की सेवा कर रहे हैं।
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि जो लोग हथियार छोड़कर मुख्य धारा में शामिल हुए हैं, उनका जीवन पटरी पर लौटे। उन्होंने विश्वास जताया कि वह दिन दूर नहीं, जब देश से माओवाद पूरी तरह समाप्त हो जायेगा।
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