कोल्लम , सितंबर 12 -- ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के राष्ट्रीय महासचिव जी. देवराजन ने शनिवार को कहा कि केरल में जारी बिजली संकट पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएपु) सरकार के कार्यकाल के दौरान बिजली विभाग की लापरवाही और दूरदर्शिता की कमी का नतीजा है।

श्री देवराजन ने कहा कि जिंदल कंपनियों के साथ 465 मेगावाट बिजली के दीर्घकालिक समझौते को बिना उचित विचार के रद्द करने के फैसले ने मौजूदा संकट को और गंभीर कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली विभाग समय पर और उचित तरीके से कंपनियों के साथ बातचीत करने में विफल रहा, जिसके कारण यह समझौता रद्द करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि एलडीएफ सरकार ने केंद्र के उस निर्देश की अनदेखी की, जिसमें राज्यों में पर्याप्त बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया था। उन्होंने कहा कि केंद्र ने अल नीनो के कारण बिजली उत्पादन में व्यवधान और बिजली की खपत बढ़ने की आशंका को देखते हुए यह निर्देश दिया था।

उन्होंने कहा कि बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में अचानक हुई बारिश के कारण कोयला खदानों में पानी भर गया और कोयले में नमी की मात्रा बढ़ गयी, जिससे बिजली उत्पादन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि उत्पादन में कमी के कारण बिजली की हाजिर खरीद कीमतों में भी वृद्धि हुई।

उन्होंने कहा कि चूंकि दिन के समय सौर ऊर्जा उपलब्ध रहती है, इसलिए पहले हुए समझौतों के तहत बिजली सरेंडर की जा रही है और केवल पीक आवर्स में बिजली खरीदी जा रही है। इससे कंपनियां नये अल्पकालिक बिजली खरीद समझौते करने के लिए अनिच्छुक हैं।

श्री देवराजन ने कहा कि केरल राज्य विद्युत बोर्ड (केएसईबी) और केरल राज्य विद्युत नियामक आयोग के बीच उचित संवाद की कमी ने भी संकट को बढ़ाने में योगदान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान अधिकारियों ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त दूरदर्शिता के साथ बिजली खरीद समझौते नहीं किये और जरूरत पड़ने पर बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने में भी विफल रहे।

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