वाराणसी , अक्टूबर 04 -- पीढ़ियों से पारंपरिक हुनर के जरिए परिवार चलाने वाले कारीगरों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना का विस्तार करते हुए इसे योजना 2.0 के रूप में शुरू किया है। इसके तहत अब 11 की जगह कुल 25 ट्रेडों के कारीगरों को लाभ मिलेगा। इसमें पांच नए पारंपरिक और नौ आधुनिक ट्रेड शामिल किए गए हैं।

उपायुक्त उद्योग अभिषेक प्रियदर्शी ने बताया कि योजना के तहत लाभार्थियों को 10 दिन का निःशुल्क प्रशिक्षण, प्रमाणपत्र और अधिकतम 15 हजार रुपये की टूलकिट दी जाएगी। प्रशिक्षण अवधि में प्रत्येक प्रशिक्षार्थी को प्रतिदिन 500 रुपये की दर से कुल पांच हजार रुपये मानदेय डीबीटी के माध्यम से मिलेगा। प्रशिक्षण गैर-आवासीय होगा।

उन्होंने बताया कि योजना में बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी के साथ मूर्तिकार, मालाकार, दूधवाला, भरभूजा और मछुआरा जैसे नए पारंपरिक ट्रेड शामिल किए गए हैं। इसके अलावा मोबाइल, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक एवं विद्युत उपकरण मरम्मत, प्लंबर, कंप्यूटर मरम्मत, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी तथा सौंदर्य एवं वेलनेस जैसे आधुनिक ट्रेड भी जोड़े गए हैं।

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