दंतेवाड़ा , फरवरी 27 -- छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा जिले के ग्राम झोडि़याबाड़म स्थित रीपा केंद्र में गुरुवार को पारंपरिक बीज मंडई का आयोजन किया गया। भूमगादी एवं निर्माण संस्था के मिरेकल मिलेट कार्यक्रम तथा कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के चारों विकास खंडों के 100 से अधिक गांवों से आए लगभग 500 से अधिक जैविक किसानों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
जिला पीआरओ से शुक्रवार मिली जानकारी के अनुसार,बीज मड़ई का मुख्य आकर्षण पारंपरिक अनाज, दलहन, तिलहन, सब्जी, कोदो, कोसरा, कंद-मूल एवं अन्य स्थानीय फसलों के बीजों का प्रदर्शन रहा। जैविक जिला के रूप में पहचान बना चुके दंतेवाड़ा में किसानों ने जैविक आदान सामग्री, बीज संरक्षण एवं रखरखाव की पारंपरिक तकनीकों की जानकारी एक-दूसरे के साथ साझा की। कार्यक्रम के दौरान किसानों ने पारंपरिक बीजों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया और जैविक खेती को अपनाकर धरती को विषमुक्त बनाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर उप संचालक कृषि सूरज पंसारी, भूमगादी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकाश बढ़ावे सहित निर्माण संस्था एवं अन्य संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जनप्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे और किसानों को पारंपरिक खेती पद्धतियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की एक विशेष उपलब्धि के रूप में, टेकनार की किसान तुलसी बाई नाग को जैविक पद्धति से धान उत्पादन में जिले में सर्वाधिक 56 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादकता प्राप्त करने पर प्रशस्ति पत्र एवं आम का पौधा देकर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, अन्य उन्नत जैविक कृषकों को भी उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में किसानों ने कोसरा चावल से बने पारंपरिक जैविक व्यंजन "मांद्राभात" का स्वाद लिया तथा इसके पोषण महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त की। आयोजन में कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग के अधिकारी, जैविक किसान एवं जैविक कार्यकर्ता सक्रिय रूप से शामिल हुए। कार्यक्रम के समापन पर किसानों ने जंगल एवं खेतों में आगजनी की घटनाओं को रोकने और जैविक खेती को निरंतर बढ़ावा देने का सामूहिक संकल्प लिया।
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