टोंक , अप्रैल 13 -- कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने राज्य में शीघ्र पंचायत राज एवं निकाय चुनाव कराये जाने की मांग करते हुए कहा है कि शहर और गांव में अभी प्रशासक लगे हुए हैं जनता के रोज के काम अधिकारी ढंग से हल नहीं कर पायेंगे तो सबकी मांग है कि जल्द से जल्द राजस्थान में चुनाव हो।
श्री पायलट सोमवार को सुबह टोंक सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत में यह मांग की। उन्होंने कहा कि उन्हें खेद है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार जब से बनी है, न तो विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ के चुनाव हुए, न नगरपालिका के चुनाव हुए हैं और न ही पंचायत चुनाव हुए हैं। तो जो मूल भावना लोकतंत्र को मजबूत करने की संविधान में अंकित है, वो कैसी होगी।
उन्होंने कहा कि न जाने चुनाव आयोग क्या कर रहा है और न जाने सरकार क्या कर रही है। न्यायालय के निर्णय के बाद भी 15 अप्रैल की समय सीमा थी। उसके बाद भी यहां चुनाव नहीं कराए गये। तो सभी लोगों की मांग है कि चुनाव हों ताकि अपने वार्ड में मेंबर्स अपने निगम, परिषद में, अपने पंचायतों में लोग चुनकर जाएं ताकि जनता के काम रोज हों।
श्री पायलट ने कहा कि अब छोटे-छोटे कामों के लिए कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक काम नहीं कर पाएंगे, सब जानते हैं। इसलिए लोगों में नाराजगी है कि बेवजह चुनाव टाले जा रहे हैं। सभी का मन है कि चुनाव हों और वह जानते है कि भाजपा की सरकार चुनाव कराना नहीं चाहती। चुनाव होंगे तो परिणाम उनके पक्ष में आने वाले नहीं हैं।
उन्होंने कहा " इस डर से वह बार-बार बहाने मारकर चुनावों को टालते हैं। सबका मन है। हम कोर्ट-कचहरी का रास्ता भी अपनाएंगे और दबाव बनाएंगे कि चुनाव हों। बाकी यहां जो आम जन समस्या रहती है, उसका निराकरण करने के लिए लगातार अधिकारियों के संपर्क में हम रहते हैं लेकिन प्रदेश में मैं जिन गांव में कल गया, किसी भी गांव में मनरेगा का काम चल नहीं रहा है लगभग समाप्त है। तो मनरेगा का नाम बदलकर जो केंद्र सरकार ने पाखंड रचा था, वो अब सामने आ गया।"उन्होंने कहा कि हम शुरू से कहते थे कि नाम बदलना उद्देश्य नहीं है, मनरेगा को समाप्त करना उद्देश्य है। आज इतिहास गवाह है, जब कांग्रेस की सरकार थी तो लाखों-लाख लोग रोज दिहाड़ी में कुछ पैसा कमाकर अपने घर जाते थे। आज राजस्थान में लगभग मनरेगा बंद हो गया। अब पूरे देश में ये हालात हो गए हैं।
श्री पायलट ने कहा कि मनरेगा को बंद कर दिया गया। ग्रामीण क्षेत्र में विकास के लिए पैसा दे नहीं रहे हैं। पंचायतों के चुनाव करा नहीं रहे हैं। तो विकास सरकार का एजेंडा नहीं है। तो सिर्फ मैनेजमेंट कर-कर इश्तहार और अखबार पोस्टर छाप कर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। इतनी घोषणाएं हो गई। अब जो बजट घोषणा हो रही है, कितनी कारगर हो रही है। चार लाख नौकरी की बात पहले बजट में की थी। अब ढाई साल पूरे हो गए हैं। कितने लोगों को नौकरी मिली है। सरकार का जो काम करने का तरीका है, वो जनता के हित में नहीं है। सब देख चुके हैं लेकिन हम पूरा दबाव बनाएंगे कि सरकार मजबूर होकर लोगों के काम करे।
गर्मी में पेयजल की व्यवस्था को लेकर उन्होंने कहा कि अभी अगले दो-चार हफ्तों के अंदर भारी किल्लत होने वाली है। तो सरकार को ऐहतियात बरत कर पहले से ही वॉटर सप्लाई, टैंक, वॉटर डिस्ट्रीब्यूशन, पाइपों की मरम्मत और अधिकारियों को पहले सचेत करना पड़ेगा कि दो महीने कैसे व्यवस्थित किया जाये। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि प्रशासन इसको गंभीरता से लेकर कार्रवाई करेगा।
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