, Dec. 8 -- शिव सेना के मिलिंद मुरली देवड़ा ने गुटका और पान मसाला के सेवन से कैंसर के खतरे का उल्लेख करते हुए इस विधेयक की सराहना की और इसी की तर्ज पर शराब के विनिर्माण संयंत्रों पर क्षमता के अनुसार उपकर और आयातित उपकरणों पर आयात शुल्क लगाने का विचार करने का सुझाव दिया।

उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि शराब के सेवन से भी कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं और अमेरिका में शराब को कैंसर के बड़े कारणों में माना गया है।

श्री देवड़ा ने पूर्व सांसद स्वर्गीय मुरली देवड़ा को याद करते हुए कहा कि उन्होंने 1995 में सार्वजनिक स्थलों पर धूम्र पान पर रोक के लिए उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की थी और उसके बाद 2001 में इस संबंध में एक केंद्रीय काूनन बना।

मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति ने विधेयक के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बधाई देते हुए कहा कि ऊपर से यह विधेयक कठोर लगता है पर यह अंदर से जनकल्याण का विधेयक है। उन्होंने इस विधेयक से प्राप्त राजस्व के एक हिस्से को पान मसाला और गुटका के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूकता पैदा किये पाने के लिए आवंटित करने का सुझाव दिया।

मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के जॉन ब्रिटास ने विधेयक की आलोचना करते हुए कहा कि इस विधेयक में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इसमें उपकर राजस्व का कितना हिस्सा राज्यों को दिया जाएगा और यह हस्तांतरण कैसे किया जाएगा।

बीजू जनता दल की सुलता देव ने कहा कि इस विधेयक में पान मसाला और गुटखा पर उपकर की जगह कर लगाया जाना चाहिए था ताकि राजस्व में राज्यों का हिस्सा सुनिश्चित हो सके।

द्रमुक की कणिमोजी एनवीएन सोमो ने कहा कि इस विधेयक में उपकर का प्रावधान इसलिए है ताकि उसके पैसे में राज्यों का हिस्सा न लगाना पड़े। अन्ना द्रमुक के डा थंबी दुरै ने विधेयक का समर्थन किया।

भाजपा के सिकंदर कुमार ने इस विधेयक को एक रणनीतिक पहल बताते हुए कहा कि इस विधेयक से जैव युद्ध , जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने , स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने, स्वास्थ्य डाटा सुरक्षा को वैश्विक स्तर का बनाने में मदद मिलेगी।

नेशनल कांग्रेस की फौजिया खान ने कहा कि उत्पादन क्षमता आधारित कोई भी कर सफल नहीं होता । उन्होंने कहा कि इससे छोटी इकाइयों के अनुपालन में परेशानी होगी। उन्होंने भी इस विधेयक को संसद की प्रवर समिति को भेजे जाने की मांग की। भाकपा के संतोष कुमार पी ने विधेयक की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार को संघीय ढांचे पर आस्था नहीं है। उन्हों ने प्रस्तावित उपकर में राज्यों के लिए प्रावधान स्पष्ट किये जाने की मांग की।

भाजपा के अजीत माधवराव गोपछड़े ने विधेयक को जैव सुरक्षा सिद्धांत की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। इसी पार्टी के डॉ भीम सिंह, माया नारोलिया, धनंजय भीमराव संगीता यादव, निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा और टीडीपी के मस्तान राव यादव ने विधेयक का समर्थन किया।

चर्चा में आईएसआर कांग्रेस के गोला बाबू राव और आम आदमी पार्टी के अशोक मित्तल ने भी भाग लिया।

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