फरीदकोट , फरवरी 22 -- पंजाब में फरीदकोट पुलिस ने पाकिस्तान समर्थित एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल का भंडाफोड़ कर सेना के एक जवान और बर्खास्त पुलिसकर्मियों सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से 4.8 किलोग्राम हेरोइन, एक .30 बोर की पिस्तौल और तीन कारतूस बरामद किए हैं।

पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने रविवार को बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान लुधियाना निवासी जरनैल सिंह उर्फ गोल्डी (वर्तमान में भारतीय सेना में कार्यरत) अमरदीप सिंह उर्फ बॉक्सर (पीएपी कैडर के बर्खास्त कर्मचारी) और फिरोजपुर निवासी डिंपल रानी; मोगा निवासी रमनदीप कौर, सरबजीत सिंह उर्फ सब्बा और अमृतपाल सिंह उर्फ अभिजोत के रूप में हुई है। पुलिस ने नशीले पदार्थों की बरामदगी के अलावा 30,000 रुपए ड्रग मनी भी जब्त की और उनके दो वाहन थार और एक्सयूवी-500 को भी जब्त कर लिया। वे इन वाहनों का इस्तेमाल ड्रग तस्करी के लिए करते थे।

श्री यादव ने कहा कि यह सफलता सुनियोजित, खुफिया जानकारी पर आधारित अभियान और दो महीने तक जेल में हुई गुप्त जांच का नतीजा है, जिससे गिरोह के गहरे संबंधों का पर्दाफाश हुआ है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि आरोपी पाकिस्तान स्थित तस्करों के सीधे संपर्क में थे, जो ड्रोन का इस्तेमाल करके हेरोइन की खेप भारतीय क्षेत्र में भेज रहे थे। डीजीपी ने कहा कि इस मामले में सभी संबंधों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।

ऑपरेशन का ब्यौरा देते हुए एसएसपी फरीदकोट डॉ. प्रज्ञा जैन ने बताया कि 20-21 फरवरी की दरमियानी रात सीआईए स्टाफ की एक टीम ने ग्रीन एवेन्यू के पास एक थार गाड़ी को रोका। डीएसपी (फरीदकोट) तरलोचन सिंह की देखरेख में तलाशी ली गई, जिसमें 1.008 किलोग्राम हेरोइन और ड्रग मनी बरामद हुई, जिसके बाद गाड़ी में सवार चार लोगों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया।

एसएसपी ने बताया, "बाद में पूछताछ के दौरान पता चला कि यह खेप अमरदीप सिंह उर्फ बॉक्सर द्वारा एक वाहन में लाई गई थी। इसी जानकारी के आधार पर पुलिस टीमों ने गोलेआना सेमनाला गांव के पास बॉक्सर और उसकी सहयोगी डिंपल रानी को रोका और उनके पास से 3.796 किलोग्राम हेरोइन और एक .30 बोर की पिस्तौल बरामद की।"डॉ. जैन ने आगे बताया कि मुख्य सरगना अमरदीप सिंह उर्फ बॉक्सर नौ आपराधिक मामलों में आरोपित एक आदतन अपराधी है, जबकि अन्य सदस्यों का भी एनडीपीएस और शस्त्र अधिनियमों के तहत गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड है। एक सेवारत सेना जवान और एक बर्खास्त पुलिस कर्मचारी की संलिप्तता एक ऐसे परिष्कृत नेटवर्क की ओर इशारा करती है जो तस्करी के लिए संस्थागत जानकारी का लाभ उठाने में सक्षम है। उन्होंने नाकों और टोल प्लाजा से आसानी से निकलने के लिए अपने आधिकारिक पहचान पत्रों का दुरुपयोग किया। वाहनों में महिला सहयोगियों का उपयोग भी नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए सोची-समझी कार्यप्रणाली की ओर संकेत करता है।

पुलिस ने सभी आरोपियों को रिमांड पर ले लिया है ताकि सीमा पार से काम करने वाले तस्करों और स्थानीय वितरण केंद्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए इनके संबंधों की गहन जांच की जा सके।

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