इस्लामाबाद , अप्रैल 07 -- पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) को लिखित आश्वासन दिया है कि वह अपने मौजूदा वित्तीय कार्यक्रम से जुड़े भ्रष्टाचार विरोधी सुधारों को लागू करेगा।

इनमें सिविल सेवकों की संपत्ति का सार्वजनिक खुलासा और जवाबदेही संस्थानों को मजबूत करने के लिए संरचनात्मक बदलाव शामिल हैं।

इन प्रतिबद्धताओं के केंद्र में दिसंबर 2026 तक वरिष्ठ संघीय सिविल सेवकों की संपत्ति की घोषणाओं को प्रकाशित करने की योजना है। इस सुधार के तहत संपत्ति का विवरण जमा करने और एकत्र करने के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल प्रणाली शुरू की जायेगी। संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए इसमें जोखिम-आधारित सत्यापन और सीमित सार्वजनिक प्रकटीकरण नियम भी होंगे।

फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू इस उद्देश्य के लिए समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है, जिसके जून 2026 तक चालू होने की उम्मीद है।

इसके साथ ही, पाकिस्तान सरकार ने राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) के कायाकल्प का संकल्प लिया है। जनवरी 2027 के लिए तय संरचनात्मक मानक के तहत इसे अधिक परिचालन स्वायत्तता दी जायेगी।

इन सुधारों में वरिष्ठ नेतृत्व के लिए एक पारदर्शी और योग्यता-आधारित चयन प्रक्रिया शुरू करना शामिल है। इसमें पहले से निर्धारित पात्रता मानदंड होंगे और सरकार, विपक्ष, न्यायपालिका, सिविल सेवा, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों वाला एक बहु-हितधारक आयोग इसकी निगरानी करेगा।

एनएबी के ढांचे को सार्वजनिक जांच के लिए भी खोला जायेगा। इसके तहत इसकी मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के साथ-साथ जांच, अभियोजन और दोषसिद्धि के वार्षिक आंकड़े प्रकाशित करने की प्रतिबद्धता जतायी गयी है। उम्मीद है कि एनएबी अध्यादेश में संशोधन के जरिये इन बदलावों को कानूनी रूप दिया जायेगा।

वित्तीय पारदर्शिता के ये उपाय बैंकिंग क्षेत्र तक भी विस्तृत हैं। अधिकारियों ने धन शोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के उद्देश्य से संपत्ति की घोषणाओं तक पहुंच बढ़ा दी है। अब बैंक संघीय और प्रांतीय स्तर के सार्वजनिक अधिकारियों के विवरणों की समीक्षा कर सकेंगे।

स्टेट बैंक, एफबीआर और फाइनेंशियल मॉनिटरिंग यूनिट सहित सहायक संस्थान इस पहुंच को क्रियान्वित करने के लिए समन्वय कर रहे हैं, जबकि अनुपालन की निगरानी के लिए उपयोग के आंकड़े भी प्रकाशित किये जायेंगे।

भ्रष्टाचार के खिलाफ व्यापक अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके तहत एक लक्षित कार्य योजना तैयार की गयी है, जो उन दस सरकारी विभागों पर केंद्रित है, जहां भ्रष्टाचार का जोखिम सबसे अधिक पाया गया है।

अक्टूबर 2026 तक पूरी होने वाली इस योजना को एक औपचारिक 'जोखिम मूल्यांकन पद्धति' के आधार पर चलाया जायेगा। यह पद्धति विभिन्न एजेंसियों के वित्तीय जोखिम, संरचनात्मक कमजोरियों, भ्रष्टाचार के पैटर्न और पुराने मामलों के इतिहास का मूल्यांकन करेगी।

इन सुधारों की निगरानी को प्रधानमंत्री की ओर से स्थापित 'भ्रष्टाचार विरोधी और एएमएल/सीएफटी समिति' के माध्यम से केंद्रीकृत किया जा रहा है। व्यापक 'आर्थिक शासन सुधार ढांचे' के तहत प्रगति पर नजर रखने के लिए कई निगरानी निकायों को जिम्मेदारी सौंपी गयी है।

वित्त मंत्रालय की ओर से अर्ध-वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित की जायेगी। साथ ही, कार्यान्वयन की समीक्षा करने और प्रदर्शन के मानकों को बेहतर बनाने के लिए विकास भागीदारों, नागरिक समाज और अन्य हितधारकों के साथ नीतिगत संवाद भी आयोजित किए जायेंगे।

प्रांतीय स्तर पर, भ्रष्टाचार विरोधी प्रतिष्ठानों को और मजबूत करने का प्रयास जारी है। इसके लिए भ्रष्टाचार से जुड़े धन शोधन मामलों की जांच के लिए उनके अधिकार क्षेत्र का विस्तार किया जा रहा है। दिसंबर 2026 तक एक संघीय अधिसूचना आने की उम्मीद है, जो औपचारिक रूप से इन निकायों को राष्ट्रीय वित्तीय खुफिया प्रणाली में शामिल करेगी। इससे वे फाइनेंशियल मॉनिटरिंग यूनिट के डाटा तक पहुंच सकेंगे और उस पर कार्रवाई कर पाएंगे।

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