कोलकाता , जून 10 -- पश्चिम बंगाल के नए उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने बुधवार को राज्य की शैक्षिक प्रतिष्ठा को पांच साल के भीतर बहाल करने का वादा किया।

श्री चट्टोपाध्याय ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान भ्रष्टाचार और शैक्षणिक मानकों में गिरावट के कारण इस क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ था। विभाग का कार्यभार संभालने के बाद अपने पहले दिन बोलते हुए, उन्होंने कहा कि शुरुआती आकलन से उन्हें यकीन हो गया है कि उच्च शिक्षा राज्य में सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में से एक है।

श्री चट्टोपाध्याय ने पत्रकारों से कहा, "शिक्षा वह क्षेत्र है जिसे पिछली सरकार के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा। हालात दमघोंटू थे। हमारा लक्ष्य अगले पांच वर्षों में बंगाल की शैक्षिक प्रतिष्ठा को फिर से शीर्ष पर पहुंचाना है।" एक प्रमुख बंगाली दैनिक के पूर्व पत्रकार रहे चट्टोपाध्याय 2021 के विधानसभा चुनावों से पहले सक्रिय राजनीति में आए और बाद में राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे। उन्हें उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी ऐसे समय में सौंपी गयी है जब यह क्षेत्र भर्ती प्रक्रियाओं और शैक्षणिक गुणवत्ता को लेकर सवालों और चिंताओं का सामना कर रहा है। मंत्री ने आरोप लगाया कि उच्च शिक्षा में भ्रष्टाचार खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है और यह केवल वित्तीय अनियमितताओं तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, "बहुत उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार है। मौद्रिक भ्रष्टाचार के अलावा, गुणवत्ता से संबंधित गंभीर मुद्दे भी हैं।"श्री चट्टोपाध्याय ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकताओं में से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के तहत नियुक्तियां निष्पक्ष और भ्रष्टाचार-मुक्त तरीके से की जाएंगी। उन्होंने कहा, "हम भ्रष्टाचार-मुक्त भर्ती सुनिश्चित करेंगे और प्रणाली में पारदर्शिता लाएंगे।"मंत्री ने हालांकि तुरंत कोई नीतिगत फ़ैसला लेने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि सुधारों के लिए कोई रोडमैप तय करने से पहले वह वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत करेंगे और विश्वविद्यालयों तथा कॉलेजों की स्थिति की विस्तृत समीक्षा करेंगे।

श्री चट्टोपाध्याय के अनुसार, विभाग में पेशेवर कामकाज का माहौल बनाना शुरुआती प्रशासनिक कदमों में से एक होगा। उन्होंने कहा कि संस्थागत ज़रूरतों का आकलन करने और उन क्षेत्रों की पहचान करने के लिए अधिकारियों और संबंधित लोगों के साथ बातचीत शुरू की जाएगी, जहां तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है। उनके ये बयान भर्ती से जुड़े विवादों और बंगाल में उच्च शिक्षा की समग्र स्थिति को लेकर चल रही सार्वजनिक बहस के बीच आए हैं। भाजपा सरकार ने बार-बार पिछली सरकार पर शैक्षणिक संस्थानों को कमज़ोर करने का आरोप लगाया है, जबकि विपक्षी दलों ने इन आरोपों को राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताकर खारिज कर दिया है।

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