लखनऊ , अक्टूबर 16 -- उत्तर प्रदेश में मौसम संबंधी आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने और समय रहते लोगों को सतर्क करने के लिए प्रदेश सरकार पांच शहरों में डॉप्लर वेदर रडार स्थापित कर रही है। इनमें से आजमगढ़ और वाराणसी में दो रडार स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि लखनऊ, झांसी और अलीगढ़ में स्थापना की प्रक्रिया जारी है।

राहत आयुक्त डॉ. ऋषिकेश भास्कर यशोद के अनुसार, इन रडार की मदद से तेज बारिश, आंधी-तूफान और अन्य गंभीर मौसमी घटनाओं की निगरानी तथा पूर्वानुमान लगाने में सहायता मिलेगी। प्रत्येक रडार की क्षमता लगभग 250 से 500 किलोमीटर तक बताई गई है। इससे मौसम की स्थिति का आकलन कर प्रशासन को समय रहते राहत एवं बचाव की तैयारियां करने में मदद मिलेगी।

डॉप्लर रडार से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने और आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए पहले से तैयारी की जा सकेगी। किसानों को भी खराब मौसम के प्रति समय रहते सचेत करने में मदद मिलेगी। इससे फसलों, पशुओं और कृषि कार्यों को होने वाले नुकसान को कम करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकेंगे।

प्रदेश के पांच शहरों में डॉप्लर वेदर रडार स्थापित करने पर लगभग 19.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त रडार स्थलों पर सिविल कार्यों के लिए 2.95 करोड़ रुपये का प्रावधान है। इस प्रकार परियोजना पर कुल 22.45 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सरकार का उद्देश्य मौसम की निगरानी और पूर्व चेतावनी व्यवस्था को मजबूत कर आपदा से होने वाले नुकसान को कम करना है।

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