कुशीनगर , फरवरी 24 -- बुद्ध स्थली कुशीनगर स्थित थाई मॉनेस्ट्री, कुशीनगर में आयोजित पांच दिवसीय पवित्र बुद्ध धातु शोभायात्रा समारोह का मंगलवार को भव्य समापन हुआ। समारोह के पांचवें दिन स्वर्ण आभायुक्त बुद्ध धातु कलश के साथ थाई मधुर संगीत के बीच आकर्षक शोभायात्रा निकाली गई।मंगलवार सुबह थाई बौद्ध धर्म गुरु फ्रा था थेप बोधियोंग के निर्देशन एवं थाई मंदिर के प्रमुख भिक्षु फ्राविडेश्चेरियन (डॉ. पी सोम पोंग) की देखरेख में महापरिनिर्वाण मंदिर, कुशीनगर में बुद्ध का विशेष पूजन-अर्चन एवं धम्म पाठ किया गया तथा चीवर अर्पित किया गया।
इसके उपरांत फ्रा बोधियोग, थाइ ट्रस्ट कुशीनारा के अध्यक्ष ननोंगग्रिड अकंचरिनयिंग, थाई राजदूत चनवर्त थामसूट, नरोंग लिट, भंते नंदका, डॉ. कितिफान, परविंदर सिंह एवं राज बंधु खन्ना की अगुवाई में रथों पर सवार भिक्षुओं और थाई अतिथियों ने शोभायात्रा निकाली। यात्रा में श्वेत परिधान में थाई महिला कलाकार पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत करती हुई चल रही थीं, जबकि विभिन्न विद्यालयों की छात्राएं भारतीय वेशभूषा में शामिल रहीं।
शोभायात्रा महापरिनिर्वाण मंदिर से बुद्ध मार्ग होते हुए रामाभार स्तूप स्थित मुकुट बंधन चैत्य पहुंची, जहां फ्रा बोधियोग ने कैंडल जलाकर पूजन किया। भिक्षुओं और श्रद्धालुओं ने परिसर में बैठकर बुद्ध की आराधना की।
चीफ मॉन्क फ्रा बोधियोग ने पंचशील के मार्ग पर चलने का आह्वान करते हुए कहा कि यही विश्व कल्याण का मार्ग है। फ्रा सोम पोंग ने बताया कि शोभायात्रा में तथागत बुद्ध के पवित्र धातु अवशेष को घुमाया जाता है और उससे पूर्व विधिवत पूजा की जाती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1898 में तत्कालीन गवर्नर कर्नल पेपे को कपिलवस्तु में खुदाई के दौरान यह अवशेष प्राप्त हुआ था, जिसे बाद में थाई राजा पंचम को भेंट किया गया। तब से यह अवशेष थाइलैंड के रॉयल पैलेस में सुरक्षित था। वर्ष 2005 में थाई महाराजा नाइन भूमिबोल अदुल्यदेज की पुत्री राजकुमारी महा चक्री शिरीन धोर्न ने इसे कुशीनगर स्थित चैत्य में स्थापित कराया था।
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