नैनीताल , जून 09 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पहाड़ की लाइफ लाइन कहे जाने वाले क्वारब-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-109) का सुदृढीकरण तय समय सीमा के अंदर पूरा करने के निर्देश जारी करते हुए इस मामले में दायर जनहित याचिका को पूरी तरह से निस्तारित कर दिया है।

इस प्रकरण को उच्च न्यायालय के अधिवक्ता भुवनेश जोशी की ओर से चुनौती दी गयी। साथ ही मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में मंगलवार को सुनवाई हुई।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता डीके जोशी की ओर से अदालत को बताया गया कि एनएच-109 को पहाड़ की लाइफ लाइन कहा जाता है। यह मार्ग अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले को जोड़ता है। इस मार्ग पर अल्मोड़ा से लगभग 10 किमी पहले क्वारब नामक स्थान पर पिछले दो साल से लगातार भूस्खलन हो रहा है।

जिससे समय-समय पर यातायात बाधित होता रहता है। इससे पहाड़ के लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पहाड़ों के लिये आवश्यक सामान की आपूर्ति भी इस मार्ग से नहीं हो पाती है। दो साल में राज्य और केन्द्र सरकार इस मार्ग को सुदृढ़ नहीं कर पायीं। प्रशासन की ओर से जो वैकल्पिक मार्ग तैयार किया गया है उसकी स्थिति भी खराब है। बरसाती सीजन दस्तक दे रहा है जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।

दूसरी ओर सरकार की ओर से कहा गया कि क्वारब में एनएच मुख्य मार्ग का निर्माण कार्य चल रहा है। केन्द्र सरकार की ओर से 17.14 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गयी है। 90 प्रतिशत काम हो गया है। 31 मार्च 2027 तक सुदृढ़ीकरण कार्य संपन्न कर लिया जायेगा।

यह भी बताया गया कि यातायात बहाली के लिये एक वैकल्पिक मार्ग भी तैयार किया गया है। उस पर डामरीकरण का भी पूरा कर लिया गया है। इसलिये अब यातायात बहाली में कोई दिक्कत नहीं होगी।

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