नयी दिल्ली , जून 30 -- चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों (अप्रैल-मई) में सरकार का राजकोषीय घाटा (आय-व्यय का अंतर) वार्षिक लक्ष्य के 9.57 प्रतिशत के बराबर रहा।

वित्त मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी केंद्र सरकार के लेखा-जोखा की मासिक समीक्षा के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में मई 2026 तक सरकार की कुल प्राप्तियां 7,18,669 करोड़ रुपये रहीं जो वित्त वर्ष के दौरान कुल प्राप्तियों के बजट अनुमान का 19.7 प्रतिशत हैं। इन प्राप्तियों में 3,48,138 करोड़ रुपये का कर राजस्व (शुद्ध रूप से केंद्र के लिए), 3,50,867 करोड़ रुपये गैर-कर राजस्व और 19,664 करोड़ रुपये की ऋण-इतर पूंजीगत प्राप्तियां शामिल हैं।

इन दोनों महीनों में केंद्र ने कुल मिलाकर राज्यों को कर में उनकी हिस्सेदारी के तौर पर 1,75,557 करोड़ रुपये हस्तांतरित किये हैं, जो पिछले साल की तुलना में 12,086 करोड़ रुपये ज्यादा है।

इन्हीं दो महीनों के दौरान केंद्र का कुल खर्च 8,81,023 करोड़ रुपये रहा जो चालू वित्त वर्ष के कुल अनुमानित खर्च का 16.5 प्रतिशत है। इसमें से 6,30,020 करोड़ रुपये राजस्व खाते पर और 2,51,003 करोड़ रुपये पूंजी खाते पर खर्च हुआ है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, कुल राजस्व खर्च में से 1,81,461 करोड़ रुपये ब्याज के भुगतान पर और 75,542 करोड़ रुपये सब्सिडी की बड़ी मदों पर खर्च हुए हैं।

इस तरह, अप्रैल-मई 2026 के दौरान आमदनी की तुलना में खर्च 1,62,354 करोड़ रुपये अधिक रहा जो चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे के 16,95,768 करोड़ रुपये के कुल बजट अनुमान का 9.57 प्रतिशत है।

सरकार ने चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत के बराबर रखने का अनुमान लगाया है। पश्चिम एशिया में युद्ध और तनाव के चलते सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ने का खतरा है। इसे देखते हुए इस लक्ष्य के समक्ष चुनौतियां बढ़ गयी हैं।

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