अमरोहा , जुलाई 10 -- उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिये अभी समय शेष है, लेकिन जमीनी स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां और विभिन्न मुद्दों पर असंतोष अभी से सामने आने लगा है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादों को लेकर जनता और विपक्षी दल सरकार से जवाब मांग रहे हैं। मुफ्त बिजली, युवाओं को रोजगार और ग्रामीण समस्याएं क्षेत्रीय राजनीति के प्रमुख मुद्दे बनते दिखाई दे रहे हैं।
राजनीतिक हलकों में मुरादाबाद में मुख्यमंत्री के हालिया दौरे के दौरान भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर को अपेक्षित महत्व नहीं मिलने की चर्चा भी रही। इस घटना को लेकर संगठन के भीतर और विशेषकर गुर्जर समुदाय से जुड़े राजनीतिक वर्गों में असंतोष की अटकलों ने जोर पकड़ा है।
उधर, दलित युवती ललिता गौतम हत्याकांड के बाद उपजे आक्रोश और आंदोलन के दौरान नौ जुलाई को मेरठ में पुलिस वाहन से जुड़े थप्पड़ कांड ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। इस घटनाक्रम के बाद दलित समाज, विशेषकर युवाओं में नाराजगी और विरोध की भावना को लेकर राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा है।
क्षेत्रीय लोगों का मानना है कि वर्ष 2022 के 'लोक कल्याण संकल्प पत्र' में किए गए कुछ वादों, विशेषकर समय पर गन्ना भुगतान और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में कुछ प्रगति देखने को मिली है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली बिलों की समस्या और युवाओं में रोजगार की कमी जैसे मुद्दे अब भी बने हुए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे समय में, जब किसान और दलित वर्ग के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर असंतोष की चर्चाएं हैं, भारतीय जनता पार्टी के लिए पश्चिम उत्तर प्रदेश में सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधना चुनौतीपूर्ण होगा। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आगामी दिनों में भाजपा इन मुद्दों और उभर रहे असंतोष से निपटने के लिए किस प्रकार की राजनीतिक रणनीति अपनाती है।
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