कोलकाता , जुलाई 14 -- पश्चिम बंगाल विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा चरण 17 जुलाई से शुरू होकर 25 जुलाई तक चलेगा।
इस दौरान अलग-अलग विभागों के प्रभारी मंत्री अपने-अपने विभागों के लिए बजट की मांगें पेश करेंगे और उन्हें मंज़ूरी दिलाने की कोशिश करेंगे।
राज्य के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने पिछले महीने ही राज्य का बजट पेश किया था। बजट सत्र का प्रथम चरण पहले ही पूरा हो चुका है। आने वाला चरण अलग-अलग विभागों के लिए अनुदान की मांगों पर चर्चा और मतदान पर केंद्रित होगा।
विधानसभा सूत्रों के मुताबिक सत्र के दौरान 13 अहम विभागों की बजट मांगों पर विचार किया जायेगा।
इस साल की कार्यवाही का मुख्य आकर्षण गृह विभाग के बजट पर चर्चा होगी, जो 22 जुलाई को होनी है। उम्मीद है कि यह बहस लगभग तीन घंटे तक चलेगी। विधानसभा में लगभग 15 वर्षों में इस तरह की यह पहली चर्चा होगी।
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान, गृह विभाग का बजट लगभग हमेशा 'गिलोटिन' प्रक्रिया के माध्यम से पारित किया जाता था। इस प्रक्रिया के तहत, समय की कमी के कारण जिन अनुदान मांगों पर अलग-अलग चर्चा नहीं हो पाती, उन्हें एक साथ मिलाकर बिना विस्तृत बहस के ही मंजूरी दे दी जाती है। नतीजतन, विधायकों को शायद ही कभी गृह विभाग के खर्चों की जांच करने या सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने का मौका मिलता था। इसका एकमात्र अपवाद 2011 में देखने को मिला, जब नयी चुनी गई तृणमूल कांग्रेस सरकार ने सत्ता संभालने के बाद विभाग के बजट पर चर्चा की अनुमति दी थी।
अब जब भाजपा सरकार सत्ता में है, तो विधानसभा में एक बार फिर गृह विभाग के वित्तीय प्रस्तावों पर पूरी तरह से बहस होगी। इस कदम को पिछले डेढ़ दशक से चली आ रही परंपरा से एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। उम्मीद है कि इस चर्चा से सदन के सदस्यों को कानून-व्यवस्था, पुलिसिंग, आंतरिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और गृह विभाग के अधिकार क्षेत्र में आने वाले अन्य मुद्दों को उठाने का मौका मिलेगा।
बहस के बाद, मुख्यमंत्री (जो गृह मंत्री भी हैं) से उम्मीद है कि वे सदस्यों की ओर से उठाये गये मुद्दों और सवालों का जवाब देंगे, जिसके बाद सदन विभाग की अनुदान मांगों पर मतदान करेगा। पिछले वर्षों में ऐसा मंत्री-स्तरीय जवाब संभव नहीं था, जब गृह विभाग का बजट बिना चर्चा के 'गिलोटिन' प्रक्रिया के माध्यम से पारित कर दिया जाता था।
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