कोलकाता , मई 18 -- पश्चिम बंगाल में कोलकाता के पार्क सर्कस सेवन-पॉइंट क्रॉसिंग पर प्रदर्शनकारियों के एक समूह और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें होने के बाद कम से कम 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एक महिला भी शामिल है।

ये झड़पें सार्वजनिक सड़कों पर नमाज़ पढ़ने पर लगाई गई पाबंदियों और अतिक्रमण हटाने तथा तोड़फोड़ की मुहिम में बुलडोज़र के इस्तेमाल को लेकर हुई थीं।

गौरतलब है कि रविवार को अपराह्न करीब 1:30 बजे पार्क सर्कस में प्रदर्शनकारी इकट्ठा होना शुरू हो गये। यह इलाका मुख्य रूप से मुस्लिम आबादी वाला इलाका है। सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म पर ऐसे पोस्ट शेयर किए गए थे जिनमें लोगों से यहां इकट्ठा होकर क्रॉसिंग से कुछ ही दूरी पर स्थित तिलजला में दो इमारतों को गिराने की मुहिम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की अपील की गई थी। इस महीने की शुरुआत में इन इमारतों में से एक में बनी एक फैक्ट्री में आग लग गई थी, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। राज्य सरकार ने फैक्ट्री मालिकों द्वारा उसे चलाने के लिए कोई भी कागज़ात या लाइसेंस पेश न कर पाने के बाद इमारतों को गिराने का आदेश दिया था।

प्रदर्शनकारियों की मांगों में से एक यह भी थी कि उन्हें सड़कें रोककर नमाज़ पढ़ने की इजाज़त दी जाए। पुलिस ने बताया कि भीड़ जल्द ही बेकाबू हो गयी, और चौराहे को खाली कराने की कोशिश कर रहे पुलिस अधिकारियों पर पत्थर और ईंटें फेंकी गयीं। अपराह्न बजे से तीन बजे के बीच करीब एक घंटे तक ट्रैफिक पूरी तरह से ठप रहा। केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ ) की एक बस में तोड़फोड़ की गयी और पत्थरबाज़ी में पुलिस के कई वाहनों को भी नुकसान पहुंचा। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों के साथ मिलकर लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। वहीं कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की टुकड़ियों को भी तैनात किया गया। मौके से कुल 21 लोगों को हिरासत में लिया गया। झड़प में कम से कम 10 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

पुलिस ने मोहम्मद फरहानुद्दीन को गिरफ्तार किया है, जिस पर आरोप है कि उसने सोशल मीडिया पर एक संदेश फैलाया था जिसमें सरकार की तोड़फोड़ मुहिम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया गया था।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वह पोस्ट बड़े पैमाने पर शेयर की गई थी और पार्क सर्कस में भीड़ जुटाने में उसका अहम रोल था। इस मामले में शामिल होने के शक में दूसरे लोगों का पता लगाने के लिए छापेमारी चल रही है। कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हमने 21 लोगों को गिरफ्तार किया है। हम इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं और उन सभी लोगों की पहचान करने के बाद और गिरफ्तारियां करेंगे, जो इस हिंसा में शामिल थे या जिन्होंने प्रदर्शनकारियों को हिंसक होने के लिए उकसाया था।"सहायक पुलिस आयुक्त (दक्षिण-पूर्व संभाग) चितादीप पांडे, उनके सुरक्षा गार्ड और इंचार्ज अधिकारी राजेश सिंह को झड़प में घायल होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अशांति फैलने से कुछ घंटे पहले अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया गया था, जिसके तहत सियालदाह और हावड़ा स्टेशनों के पास फुटपाथ और सड़कों पर कब्ज़ा जमाए स्टॉल और अवैध कब्ज़े हटाए गए थे। यह अशांति राज्य के दूसरे हिस्सों में हुई कई तनावपूर्ण घटनाओं के बाद फैली है।

कोलकाता के राजाबाज़ार इलाके में शुक्रवार (15 मई) को उस समय तनाव बढ़ गया, जब मुसलमानों ने पाबंदी के बावजूद एक सार्वजनिक सड़क पर नमाज़ पढ़ने की कोशिश की। भारी संख्या में मौजूद पुलिस बल ने जब नमाज़ियों से सड़क खाली करने को कहा, तो हालात और बिगड़ गए। रिपोर्टों के मुताबिक, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कैबिनेट की एक बैठक के दौरान निर्देश दिया था कि नमाज़ सिर्फ़ मस्जिदों के अंदर ही पढ़ी जानी चाहिए, सार्वजनिक सड़कों पर नहीं।

पश्चिम बर्धमान ज़िले के जहांगीर मोहल्ले में भी शुक्रवार रात (15 मई) को हिंसा भड़क उठी। यह घटना तब हुई, जब स्थानीय लोगों की शिकायतों के बाद पुलिस की एक टीम ने मस्जिद प्रशासन से लाउडस्पीकर की आवाज़ कम करने को कहा। आरोप है कि इसके जवाब में भीड़ ने पथराव किया और पुलिस चौकी में तोड़फोड़ की।

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