कोलकाता , मई 25 -- पश्चिम बंगाल में तीन बंगलादेशी नागरिकों को सोमवार को मुर्शिदाबाद जिले के लालगोला में बनाए गए नये 'होल्डिंग सेंटर' में भेजा गया जिन आरोप है कि ये बिना किसी वैध दस्तावेज़ के देश में घुसपैठ कर रहे थे।
राज्य में शायद यह पहला मौका है, जब किसी बंगलादेश नागरिक को 'होल्डिंग सेंटर' में भेजा गया है। इन घुसपैठियों को नबन्ना (राज्य सचिवालय) की ओर से पश्चिम बंगाल में रह रहे अवैध विदेशी नागरिकों और घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें देश से बाहर निकालने के सख्त निर्देश जारी करने के बाद भेजा गया।
पुलिस और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इन तीनों संदिग्ध घुसपैठियों को मुर्शिदाबाद जिले के रानीताला पुलिस थाना क्षेत्र से हिरासत में लिया गया था। अधिकारियों ने बताया कि वे भारत में रहने की अनुमति देने वाला कोई भी वैध दस्तावेज़ पेश नहीं कर पाए। हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान मोहम्मद सलीम, मोहम्मद रूबल और शरीफुल इस्लाम के रूप में हुई है।
परंपरागत रूप से ऐसे घुसपैठियों को गिरफ्तारी के बाद सीधे जेल भेज दिया जाता था।राज्य सचिवालय के नवीनतम दिशानिर्देशों के बाद, प्रशासन ने अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव किया है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद, इन तीनों व्यक्तियों को जेल में रखने के बजाय लालगोला में तैयार किए गए विशेष होल्डिंग सेंटर में भेज दिया गया।
हाल ही में, राज्य के गृह विभाग ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों (डीएम ) और पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को एक सख्त निर्देश जारी किया था। इस निर्देश में कहा गया था कि बंगलादेश और म्यांमार से अवैध रूप से आने वाले लोगों (जिनमें 'विदेशी अधिनियम' के तहत दर्ज रोहिंग्या भी शामिल हैं) को अब आम कैदियों के साथ सामान्य जेलों में नहीं रखा जाना चाहिए। इसके बजाय उन्हें पहचानना होगा, अदालत के सामने पेश करना होगा, और फिर देश-निकाले की प्रक्रिया पूरी होने तक सीधे सरकार द्वारा चलाए जा रहे होल्डिंग सेंटरों या हिरासत शिविरों में भेजना होगा। इस निर्देश के बाद मुर्शिदाबाद ज़िला प्रशासन ने तेज़ी से कदम उठाते हुए लालगोला शिविर को एक होल्डिंग सेंटर के तौर पर चालू कर दिया। रानीताला से हिरासत में लिए गए तीन बंगलादेशी नागरिकों को अब वहीं रखा गया है।
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और ज़िला पुलिस मिलकर हिरासत में लिए गए लोगों के बारे में विस्तृत जानकारी जुटा रहे हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय कानूनी तालमेल बिठाया जा सके और उन्हें बंगलादेश वापस भेजने की प्रक्रिया में तेज़ी लाई जा सके।
राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम बंगाल में अवैध घुसपैठ पर रोक लगाने और देश-निकाले की प्रक्रियाओं में तेज़ी लाने के मामले में केंद्र और राज्य सरकार के बीच बढ़ते तालमेल का संकेत है। मुर्शिदाबाद का यह मामला नई नीति के तहत की गई पहली बड़ी कार्रवाइयों में से एक के तौर पर देखा जा रहा है।
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