कोलकाता , जून 22 -- पश्चिम बंगाल सरकार ने सोमवार को विधानसभा में पेश किए गए 2026-27 के बजट में राज्य में निवेश आकर्षित करने एवं औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से कई बड़े सुधारों की घोषणा की।
राज्य के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने बजट पेश करते हुए ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस (कारोबार में आसानी) और निवेश के लिए बेहतर माहौल बनाने पर केंद्रित कई उपायों की घोषणा की। अहम घोषणाओं में बड़े पैमाने पर निवेश के लिए एकल खिड़की मंजूरी प्रणाली शुरू करना शामिल है।
नई नीति के अंतर्गत 100 करोड़ रुपये या उससे ज़्यादा के प्रस्तावित निवेश के लिए अब ज़िला परिषदों और पंचायत निकायों से अलग-अलग बिल्डिंग प्लान की मंज़ूरी, व्यापार लाइसेंस या दूसरी अनुमतियों की आवश्यकता नहीं होगी। इसके बजाय, सभी मंज़ूरियों की प्रक्रिया एक तय समय-सीमा के भीतर राज्य-स्तरीय एकीकृत व्यवस्था के ज़रिए पूरी की जाएगी। सरकार ने बड़े संस्थागत निवेश में आने वाली रुकावटों को दूर करने के लिए अर्बन लैंड (सीलिंग एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1976 की समीक्षा करने की भी घोषणा की। राज्य सरकार ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य शहरी ज़मीन की वाणिज्यिक क्षमता का उपयोग करना और बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है।
उद्योग के लिए ज़मीन की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से, सरकार राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और दूसरी सरकारी एजेंसियों के पास मौजूद बेकार पड़ी ज़मीन की पहचान करके एक बड़ा लैंड बैंक बनाने की योजना बना रही है। नयी पॉलिसी के अंतर्गत, सरकार औद्योगिक क्षेत्र में आवंटित की गई उस ज़मीन की समीक्षा करेगी जो अनुबंध की समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी इस्तेमाल नहीं हुई है। सरकार ऐसी ज़मीन वापस ले लेगी और लीज़ प्रीमियम व उससे जुड़े चार्ज बिना ब्याज के लौटा दिए जाएंगे।
इन जमीनों को फिर एक तकनीक-चालित एवं पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से पुन: आवंटित किया जाएगा। बजट में पश्चिम बंगाल शॉप्स एंड एस्टैब्लिशमेंट एक्ट, 1963 में संशोधन करने का भी प्रस्ताव रखा गया है ताकि व्यवसाय लगातार चल सकेवित्त मंत्री ने यह भी कहा कि दुकानों, रेस्तरां, कार्यालयों, रसद कंपनियों और आतिथ्य स्थलों को पूरी तरह से काम करने की अनुमति दी जाएगी लेकिन मजदूरों की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध आवश्यक होगा। यह पहल शुरू में कोलकाता और अन्य बड़े शहरी केंद्रों में पायलट परियोजना के रूप में लागू की जाएगी। निवेशकों का भरोसा बढ़ाने और कारोबार करने की लागत कम करने के लिए, सरकार ने वैध कारोबारों को प्रभावित करने वाली अवैध वसूली, जबरन वसूली और सिंडिकेट शुल्क के खिलाफ़ सख़्त कानून लाने की योजना की घोषणा की। प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप क्षेत्र के लिए भी कई उपायों की घोषणा की गई है।
राज्य सरकार अगले तीन महीनों में एक नई स्टार्टअप पॉलिसी लाने वाली है और इसे 40 करोड़ रुपये के इनक्यूबेशन फंड और 60 करोड़ रुपये के वेंचर कैपिटल फंड का समर्थन मिलेगा। सरकार ने वैश्विक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने और राज्य के डीप-टेक स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए 50 करोड़ रुपये का मुख्यमंत्री विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रतिभा आकर्षण फंड भी घोषित किया।
राज्य सरकार उच्च-मूल्य वाले व्यावसायिक परिचालनों को आकर्षित करने के लिए एक समर्पित ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर नीति पेश करने की भी योजना बना रही है। इसने कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज को पुनर्जीवित करने के समर्थन की भी घोषणा की और पूंजी जुटाने के लिए संभावित राज्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध करने की योजना भी बनाई है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित