नयी दिल्ली , जून 11 -- पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को यहां नीति आयोग की संचालन परिषद की ग्यारहवीं बैठक में कहा कि राज्य केंद्र सरकार के सहयोग से विकास, तरक्की और पारदर्शी शासन के एक नये दौर में प्रवेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
मुख्यमंत्री ने राज्य की अर्थव्यवस्था सुधारने, सड़कों और बुनियादी ढांचे को बेहतर करने और युवाओं को रोजगार देने का एक पूरा खाका पेश किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर केंद्र और राज्य मिलकर काम करेंगे, तो विकास तेजी से होगा, नया निवेश आएगा और आम लोगों तक सरकारी योजनाओं का फायदा आसानी से पहुंचेगा।
इस उच्च स्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ नीति निर्माताओं को संबोधित करते हुए श्री अधिकारी ने कई प्रस्तावों की रूपरेखा रखी। उन्होंने विशेष रूप से उत्तर बंगाल पर ध्यान केंद्रित करते हुए कहा कि इस क्षेत्र को विशेष ध्यान के साथ राष्ट्रीय विकास पहलों के साथ मजबूती से जोड़ने की आवश्यकता है।
इस दृष्टिकोण के तहत मुख्यमंत्री ने सिलीगुड़ी को एक बड़े शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि रणनीतिक रूप से स्थित इस शहर में उच्च शिक्षा और कौशल विकास के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरने की क्षमता है, जो न केवल उत्तर बंगाल बल्कि पड़ोसी राज्यों और क्षेत्रों की जरूरतों को भी पूरा करेगा।
उत्तर बंगाल में उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य ढांचे के लिए अधिक केंद्रीय सहायता की मांग करते हुए श्री अधिकारी ने औपचारिक रूप से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) जैसे प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों की स्थापना का अनुरोध किया। उनके अनुसार, ये संस्थान छात्रों और पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ क्षेत्र के शैक्षिक और स्वास्थ्य तंत्र को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करेंगे।
श्री अधिकारी ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी बंदरगाह-आधारित विकास पहल 'सागरमाला 2' कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के शामिल होने और सक्रिय रूप से भाग लेने के निर्णय की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस परियोजना में शामिल होने से बुनियादी ढांचे का विस्तार करने, लॉजिस्टिक्स में सुधार करने और बेहतर संपर्क तथा समुद्री विकास के माध्यम से राज्य की आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कई प्रमुख केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने की भी प्रतिबद्धता जताई, जो राज्य के कुछ हिस्सों में पूरी तरह संचालित नहीं हो पा रही थीं। उन्होंने विशेष रूप से प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री जन धन योजना और अटल पेंशन योजना का जिक्र करते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाएंगे कि इनका लाभ हर पात्र लाभार्थी तक पहुंचे।
श्री अधिकारी ने जोर देकर कहा कि पश्चिम बंगाल की आर्थिक क्षमता को उजागर करने के लिए पारदर्शी शासन और सहकारी संघवाद अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा कि मजबूत केंद्र-राज्य समन्वय एक अधिक सुरक्षित नीतिगत माहौल बना सकता है, निजी निवेश को प्रोत्साहित कर सकता है और राज्य में बड़े उद्योगों की स्थापना की राह आसान कर सकता है।
मुख्यमंत्री के ये विचार नीति आयोग के मंच पर पश्चिम बंगाल की भागीदारी में एक बड़े बदलाव का संकेत देते हैं। हाल के वर्षों में, ऐसे मंचों पर तत्कालीन राज्य सरकार और केंद्र के बीच की बातचीत अक्सर राजनीतिक असहमतियों और कभी-कभार के बहिष्कारों की भेंट चढ़ जाती थी। श्री अधिकारी के संबोधन ने हालांकि राजनीतिक टकराव के बजाय विकास-संचालित शासन पर जोर देते हुए केंद्र सरकार के साथ सहयोग और साझेदारी का संदेश दिया।
श्री मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की संचालन परिषद की ग्यारहवीं बैठक में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए देश भर के मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों और वरिष्ठ नीति निर्माताओं को एक साथ लाया गया।
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