रामपुर , अप्रैल 06 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने सोमवार को यहां कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने ममता सरकार की "बिदाई का बैंड बाजा" बजा दिया है, यही कारण है कि उनका "मां,माटी, मानुष का झांसा" "मांस, माछी, मुसलमान" के झोल में बदल गया है।
श्री नकवी ने आज रामपुर में भाजपा स्थापना दिवस पर कहा कि बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सरकार अपने कार्यकाल में मां की सुरक्षा, मानुष का सशक्तिकरण और माटी के सम्मान में फेल होने के बाद अब मांस, माछी और मुसलमान को अपने कुशासन का कवच बनाने में लगी है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने उनके कुशासन की 'री इंट्री पर नो इंट्री' का बोर्ड लगा दिया है, इस बार तृणमूल कांग्रेस के जंगल राज के सफाए के साथ भाजपा के मंगल राज की स्थापना होगी।
श्री नकवी ने ओवैसी एंड कम्पनी पर बिना नाम लिए कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ लोग हर चुनाव में सेक्युलर शेरवानी, कम्युनल कारस्तानी के साथ मुसलमानों का जिल्लेईलाही बनने की कोशिश करते रहते हैं। इनकी सोच मुसलमानों में भाजपा के प्रति असहिष्णुता, अस्पृश्यता का साम्प्रदायिक संक्रमण फैला कर उनका सियासी शोषण की होती है। मुसलमानों को प्रगति की मुख्य धारा से काटने की अपराधिक साज़िश से सावधान और साम्प्रदायिक छल को समझदारी के बल से छूमंतर करना होगा।
भाजपा नेता ने केरल में कांग्रेस और कम्युनिस्टों में चल रही उठा-पटक और सिर-फुटव्वल पर कटाक्ष करते हुए कहा कि "दिल्ली में एक दूसरे को गला लगाने वाले केरल में एक दूसरे का गला दबाने में जुटे हैं।" केरल में कांग्रेस-कम्युनिस्ट का कम्युनल चैंपियन बनने की प्रतिस्पर्धा इनके खोखले सैद्धांतिक गुब्बारे और सत्तालोलुप सियासत की हवा निकाल रही है।
श्री नकवी ने वर्तमान वैश्विक संकट पर कहा कि 'विस्तारवादी सनक, विकासवादी सोच की दुश्मन है', युद्ध में जहां कोई भी देश अपने संसाधनों को दूसरों के विनाश में बर्बाद करता है, शान्ति में अपने संसाधनों का देश के विकास में इस्तेमाल करता है। युद्ध विनाश और शान्ति विकास का रास्ता है।
श्री नकवी ने कहा कि दुनिया गवाह है कि मुल्कों की अस्थाई जंग ने मानवता को स्थाई जख़्म दिया है, आज के वैज्ञानिक युग में विश्व युद्ध का विचार ही सम्पूर्ण मानव सृष्टि के विनाश को आमंत्रण है। जंग के जख़्म पर अमन का मरहम मानवता की हिफाज़त कर सकता है। उन्हाेंने कहा कि बारूदी ढेर पर बैठे वर्तमान वैश्विक संकट के दौर में भारत समझदारी, संवेदनशीलता, संवाद, समन्वय से खुद को संकट से सुरक्षित रखने के सार्थक प्रयास कर रहा है।
श्री नकवी ने कहा कि आज विश्व को विस्तारवाद की नहीं बल्कि विकासवाद की ज़रूरत है, किसी भी युद्ध की विभीषिका का मनोवैज्ञानिक जख़्म पीढियों तक ताज़ा रहता है, हिरोशिमा, नागासाकी इसका ज्वलंत उदाहरण है। आज दुनिया को आर्थिक असमानता, अशिक्षा, बेरोजगारी, आतंकवाद, असहिष्णुता, अराजकता के खिलाफ विश्व युद्ध की जरूरत है, यही वैश्विक संकट के अन्त और स्थायित्व की गारण्टी है। कोई भी युद्ध समस्या का समाधान नहीं बल्कि खुद एक समस्या है।
श्री नकवी ने कहा कि भारत अपनी सम्प्रभुता, सुरक्षा-सम्मान को सर्वोपरी रख वैश्विक संकट के सार्थक समाधान की सोंच के साथ संकट के सागर से अमन का अमृत निकलने के पक्ष में है। बुद्ध की धरती युद्ध के धमाकों को मानवता के वसूल और मुल्कों के वजूद का शत्रु मानती है।
श्री नकवी ने कुछ कविता और शेर के जरिए वैश्विक संकट पर संदेश दिया ।
"वो ज़ब्र भी देखा है तारीख़ की नज़रों ने। लम्हों ने खता की थी सदियों ने सजा पाई।।""जंग में क़त्ल सिपाही होंगे। सुरखुरू ज़िल्ले ईलाही होंगे।।
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