सिलीगुड़ी , सितंबर 13 -- पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में हसीमारा के पास बंद पड़े मधु चाय बागान के श्रमिकों ने प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करने और अपने लंबे समय से लंबित बकाए के भुगतान की मांग को लेकर अपना आंदोलन फिर से शुरू कर दिया है।
श्रमिकों का विरोध प्रदर्शन पिछले वर्ष 18 मई को शुरू हुआ था, जिसके बाद प्रबंधन ने काम बंद करने का नोटिस जारी कर दिया, तब से श्रमिक और उनके परिवार गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
हाल ही में गृह एवं पर्वतीय मामलों के राज्य मंत्री विशाल लामा के चाय बागान श्रमिकों से मुलाकात कर उनके हित में उचित कदम उठाने का आश्वासन मिलने के बाद श्रमिकों की उम्मीदें फिर से जगी हैं। श्रमिकों ने अब सोमवार से अपना आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। श्री लामा के हस्तक्षेप के बाद बीरपाड़ा के सहायक श्रम आयुक्त ने भी हाल ही में श्रमिकों से मुलाकात कर आधिकारिक कार्रवाई शुरू करने के लिए संबंधित दस्तावेज एकत्र किए हैं।
पश्चिम बंगाल चाय मजदूर समिति के केंद्रीय समिति सदस्य और मधु चाय बागान के श्रमिक बिनय केरकेट्टा के अनुसार, स्थायी कर्मचारियों को छह पखवाड़े से वेतन नहीं मिला है, जबकि दिहाड़ी श्रमिकों का 12 पखवाड़े का वेतन बकाया है। कुल बकाया मजदूरी का अनुमान लगभग एक करोड़ रुपये लगाया गया है। उल्लेखनीय है कि उत्तरी बंगाल में चाय बागान श्रमिकों को 250 रुपये प्रतिदिन की दिहाड़ी मिलती है।
श्रमिकों का यह भी दावा है कि वर्ष 2022 से 2025 की अवधि के दौरान, जब बागान बंद रहा था, तब का बकाया लगभग 15 से 20 करोड़ रुपये है। उनका आरोप है कि भविष्य निधि अंशदान और वेतन को सही ढंग से जमा या चुकता नहीं किया गया। इससे पहले 2022 में भी पिछले मालिक के जाने के बाद बागान बंद हो गया था। बाद में जब इसे फिर से खोला गया, लेकिन केवल 600 श्रमिकों को ही वापस लिया गया।
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