तिरुवनंतपुरम , मार्च 31 -- कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं सांसद मनीष तिवारी ने मंगलवार को पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट को लेकर केंद्र सरकार की 'चुप्पी' की कड़ी आलोचना करते हुए इसे गंभीर भू-राजनीतिक और आर्थिक प्रभावों वाला मुद्दा करार दिया।

श्री तिवारी ने केरल कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी सहयोगियों के साथ आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि भारत की पारंपरिक विदेश नीति साम्राज्यवाद विरोध और गुटनिरपेक्षता पर आधारित रही है। मौजूदा सरकार उससे समझौता कर रही है। उन्होंने केन्द्र की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश युद्धों से बच सकते हैं, लेकिन अक्सर 'चुप्पी के कारण नष्ट हो जाते हैं।'उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या भारत परोक्ष रूप से जबरन शासन परिवर्तन और लक्षित हत्याओं का समर्थन कर रहा है। इस संदर्भ में उन्होंने क्षेत्र में बड़े घटनाक्रमों से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इज़रायल यात्रा का उल्लेख किया।

श्री तिवारी ने आर्थिक प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए चेतावनी दी कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख समुद्री मार्गों में व्यवधान से भारत की ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के शासन काल की तुलना में ईंधन की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है और केरल में एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी है, जहां प्रतीक्षा अवधि 45 दिनों तक पहुंच गयी है तथा काला बाज़ार बढ़ने की खबरें हैं। उन्होंने यह भी कहा कि फारस की खाड़ी में अस्थिरता से नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों के आयात में बाधा आ सकती है, जिससे कृषि क्षेत्र और देश की खाद्य सुरक्षा को खतरा उत्पन्न होगा।

श्री तिवारी ने घरेलू मुद्दों पर प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक पर तीखा हमला करते हुए इसे 'दमनकारी' और 'सत्तावादी' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 के साथ-साथ संपत्ति के अधिकार से संबंधित अनुच्छेद 300ए तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि विधेयक मौलिक रूप से त्रुटिपूर्ण है और इसे वर्तमान स्वरूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस संसद में इसका कड़ा विरोध करेगी और इसे विस्तृत जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति या प्रवर समिति के पास भेजे जाने की मांग करेगी।

उन्होंने पारदर्शिता पर जोर देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में प्रवासियों की मेजबानी करने वाले केरल और पंजाब जैसे राज्यों के नागरिक सरकार से स्पष्ट जानकारी और ठोस कार्ययोजना के हकदार हैं, न कि वर्तमान 'भ्रम पैदा करने वाले' दृष्टिकोण के।

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