रांची , जुलाई 22 -- झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर प्रखंड केबुढ़ाकमान गांव में जंगली हाथियों देर रात 35 वर्षीय चंद्रमोहन सिंकू को सूंड में लपेटकर कई बार जमीन पर पटक दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
चंद्रमोहन चार बच्चों के पिता थे। उनकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पत्नी जेमा सिंकू और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि पूरे गांव में शोक का माहौल है।
पारवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, घटना रात करीब एक बजे की है। चंद्रमोहन सिंकू का सामना गांव में घूम रहे जंगली हाथी से हो गया। हाथी ने उन्हें सूंड में जकड़ लिया और कई बार जमीन पर पटक दिया। गंभीर रूप से घायल चंद्रमोहन को ग्रामीणों और जिला परिषद सदस्य मानसिंह तिरिया की मदद से तत्काल जगन्नाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
चंद्रमोहन की मौत के बाद भी हाथियों का उत्पात नहीं रुका। हाथियों का झुंड बुढ़ाकमान से निकलकर मुगादिघिया, तेंतोड़ीपोसी और लुतुसाई गांव पहुंच गया। इन गांवों में तीन ग्रामीणों के घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। खेतों में लगी फसलें रौंद दी गईं और बागवानी को भी भारी नुकसान पहुंचा। एक किसान के घर में रखा करीब तीन क्विंटल धान हाथी खा गए तथा घर में रखा अन्य सामान भी नष्ट कर दिया।
हाथियों के गांव में घुसने से ग्रामीणों में पूरी रात अफरा-तफरी का माहौल रहा। लोग मशाल, टॉर्च और पटाखों के सहारे हाथियों को भगाने की कोशिश करते रहे, लेकिन झुंड गांवों के आसपास मंडराता रहा। दहशत के कारण ग्रामीण पूरी रात जागते रहे।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम आज मौके पर पहुंची और नुकसान का आकलन शुरू किया। विभाग की ओर से मृतक की पत्नी जेमा सिंकू को तत्काल एक लाख रुपये की अग्रिम सहायता राशि प्रदान की गई। यह राशि जगन्नाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में जिला परिषद सदस्य मानसिंह तिरिया की मौजूदगी में सौंपी गई।
ग्रामीणों ने मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने, क्षतिग्रस्त घरों और बर्बाद फसलों का सही आकलन कर मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि हाथियों का गांवों में लगातार प्रवेश अब लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों की आवाजाही रोकने और मानव-हाथी संघर्ष पर स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है।
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