जैसलमेर , जनवरी 13 -- केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के प्रयासों से वर्ष 2021-22 में राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में किये गये हेलीकॉप्टर आधारित भूभौतिकीय सर्वेक्षण के परिणामों से पश्चिम राजस्थान के जल विहीन क्षेत्र में पानी की समस्या के स्थायी समाधान की संभावनाएं जगी हैं।
इस संबंध में राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई) हैदराबाद द्वारा गत दिनों जैसलमेर जिला कलेक्टर एवं राज्य भूजल बोर्ड (एसजीडब्ल्यूबी) को सर्वेक्षण की भेजी गई रिपोर्ट मे ऐसे स्थानों पर भू जल मिलने की जानकारी मिली है जहाँ पर अभी तक क़े अनुसन्धानों में भू जल मिलने में सफलता नहीं मिली थी।
केंद्रीय भू जल बोर्ड, एनजीआरआई हैदराबाद एवं राजस्थान सरकार के भू जल विभाग क़े सहयोग से किये गये इस सर्वेक्षण मे खासकर जैसलमेर जिले के पोकरण विधानसभा के फालसूड से छायन एवं धुडसऱ से राजगढ़ तक क़े क्षेत्र में गहन अनुसंधान किया गया था। वहां भूजल के भंडार होने का खुलासा हुआ है।
वरिष्ठ भू जल वैज्ञानिक डॉ नारायण दास इणखिया ने बताया कि जैसलमेर जिले के पोकरण तहसील का अधिकांश हिस्सा भू जल की दृष्टि से कम पानी वाला माना जाता है। भू भौतिकीय सर्वेक्षण में ऐसे गांवों में भू जल मिलने के आसार जगे हैं, जहाँ बिल्कुल भी पानी की सम्भावना नहीं थी।
उन्होंने बताया कि जिले के पोकरण क्षेत्र में किये गये सर्वेक्षण में कुल 64 स्थानों में भू जल की उपलब्धता बताई गयी है। इन स्थानों में बड़ी संख्या में स्थान ऐसे हैं जहाँ अब तक पहले हुए अनुसंधान में पानी नहीं मिल पाया था। इन स्थानों मे ज्यादातर वे गांव हैं जहाँ पेयजल की किल्लत आम रहती है। इस भू भौतिकीय सर्वेक्षण में न केवल भू जल स्रोतों को ढूंढ़ने मे मदद मिली है बल्कि भू जल की पुनर्भरण के लिए उपयुक्त स्थानों की भी जानकारी मिली है।
पोकरण, भनियाणा उपखंड में नहर का पानी हालांकि पेयजल के लिए उपलब्ध हो गया है, लेकिन भू जल की उपलब्धता बताने वाले इन स्थानों पर नलकूप निर्माण से आपात परिस्थितियों में लोगों को पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। फलसुंड क्षेत्र में भू जल का मिलना एक विशेष उपलब्धि होगीडाॅ इनिखिया ने बताया कि हाल ही में जैसलमेर जिले के सांकड़ा खण्ड में उत्तर-पश्चिम राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में उच्च-रिज़ॉल्यूशन जलदायी स्तर मानचित्रण के लिये किए गए भू-भौतिकीय सर्वेक्षण की रिपोर्ट मिली है जिसके सुखद परिणाम सामने आ रहे हैं। इससे इस क्षेत्र में जल संकट से निश्चित रूप से नजात मिल सकेगाी । जैसलमेर जिले में करीब 15 हजार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में भू भौतिकीय सर्वेक्षण किया गया था।
उन्होंने बताया कि हेलीबोर्न सर्वे हेलिकोप्टर माध्यम से की जाने वाला सर्वेक्षण है। इसमें भू जल सर्वेक्षण के लिए. इलेक्ट्रो मेग्नेटीक सर्वेक्षण एवं भू भौतिकीय दोनों तरह की प्रक्रिया से भू जल की खोज की जाती है जिससे कम क्षेत्र में भी सटीक परिणाम प्राप्त होते हैं। वर्ष 2021-22 में राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों, जिनमें जैसलमेर एवं जोधपुर शामिल हैं, में जलदायी स्तर मानचित्रण कार्यक्रम के तहत उन्नत हेलीकॉप्टर आधारित भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और वैज्ञानिक अध्ययनों के माध्यम से भूजल की खोज की जाएगी।
केंद्रीय भूजल बोर्ड, जल शक्ति मंत्रालय एवं वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) एवं एनजीआरआई हैदराबाद के बीच एक समझौता किया गया है, जिसके तहत राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब एवं हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में उन्नत हेलीकाॅप्टर आधारित भू-भौतिकीय सर्वेक्षण एवं अन्य वैज्ञानिक अध्ययन किए जाएंगे। यह सर्वेक्षण जलदायी स्तर मानचित्रण कार्यक्रम के तहत कुल तीन लाख 88 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में किया जायेगा।
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