बेतिया , अप्रैल 9 -- सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग ने जिले में 75 वर्ष से अधिक पुरानी पांडुलिपियों के संरक्षण एवं सर्वेक्षण का कार्य शुरू किया गया है।

विभाग के अनुसार प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र एवं कपड़े पर लिखित पांडुलिपियों के रूप में अमूल्य विरासत है, जिसका संरक्षण सामूहिक दायित्व है।

भारत सरकार की फ्लैगशीप पहल ज्ञान भारतम मिशन के तहत जिले में पांडुलिपियों का वैज्ञानिक संरक्षण डिजिटलीकरण और अभिलेखीकरण किया जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी राकेश कुमार ने बेतिया राज अभिलेखागार का निरीक्षण कर पुराने दस्तावेजों एवं पांडुलिपियों का अवलोकन किया।

बेतिया राज प्रबंधक सह अपर समाहर्ता अनिल कुमार सिन्हा के नेतृत्व में सर्वेक्षण कार्य प्रारंभ हो चुका है। उन्होंने बताया कि 75 वर्ष से अधिक पुरानी पांडुलिपियों का राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से विकसित मोबाइल एप के माध्यम से तीन माह में पूरा किया जाएगा।उन्होंने कहा कि बेतिया राज में 100 वर्ष से अधिक पुरानी उर्दू, फारसी, रोमन एवं कैथी लिपि की पांडुलिपियां उपलब्ध हैं, जिनका सर्वेक्षण किया जा रहा है। मिशन के तहत इन धरोहरों को संरक्षित कर आमजन एवं शोधार्थियों के लिए सुलभ बनाया जाएगा।

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