चंडीगढ़ , सितंबर 15 -- भारतीय सेना की पश्चिमी कमान ने मंगलवार को चंडीमंदिर में अपना 80वां स्थापना दिवस मनाया।

इस अवसर पर पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने वीर स्मृति युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीपी मलिक ने भी स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की।

पश्चिमी कमान का इतिहास 1905 के किचनर सुधारों के तहत भारतीय सेना के पुनर्गठन से जुड़ा है। स्वतंत्रता और विभाजन के बाद सितंबर 1947 में तत्कालीन उत्तरी सेना के पूर्वी हिस्से को दिल्ली एवं पूर्वी पंजाब कमान के रूप में पुनर्गठित किया गया, जो जनवरी 1948 में पश्चिमी कमान के रूप में अस्तित्व में आया।

कमान ने 1947-48, 1962, 1965 और 1971 के युद्धों के अलावा कई सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। हाल के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर उसे सौंपे गए कार्यों के प्रभावी निष्पादन में कमान ने परिचालन तत्परता और संयुक्त सैन्य समन्वय का प्रदर्शन किया। वर्ष 2025 में ऑपरेशन राहत के दौरान भी कमान ने मानवीय सहायता और आपदा राहत के लिए तेजी से संसाधन जुटाये।

पश्चिमी कमान के वीरता के इतिहास में उसके सैनिकों को 11 परमवीर चक्र, एक अशोक चक्र और 143 महावीर चक्र सहित अनेक वीरता एवं विशिष्ट सेवा पुरस्कार मिल चुके हैं। सेना के अनुसार, पिछले दशकों में पश्चिमी कमान आधुनिक, चुस्त, प्रौद्योगिकी-सक्षम और युद्ध के लिए तैयार बल के रूप में विकसित हुई है। क्षमता विस्तार, तकनीकी समावेशन, नवाचार, संयुक्त प्रशिक्षण, मजबूत बुनियादी ढांचे और निरंतर परिचालन तैयारी के जरिए कमान पश्चिमी सीमाओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

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