लुधियाना , सितंबर 18 -- पंजाब के पशुपालन, मत्स्य पालन एवं डेयरी विकास मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने शुक्रवार को यहां गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (गडवासू) में आयोजित पशु पालन मेले का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद, पुस्तकें और अन्य साहित्य जारी किये गये। मेले में विभिन्न पशुधन नस्लों और विश्वविद्यालय की अनुसंधान तकनीकों को प्रदर्शित किया गया। मंत्री ने विभिन्न स्टॉलों का दौरा कर किसानों के लिए उपलब्ध सेवाओं और तकनीकों की जानकारी ली तथा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की।
सभा को संबोधित करते हुए श्री खुड्डियां ने कहा कि पशुपालन प्राचीन समय से ही पंजाब की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है। पहले किसी व्यक्ति की संपन्नता का आकलन केवल उसकी जमीन से नहीं, बल्कि उसके पशुधन की संख्या से भी किया जाता था। उन्होंने कहा कि पशुपालन को बड़े स्तर पर अपनाकर दूध उत्पादन में अधिशेष हासिल किया जा सकता है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य के साथ किसानों की आय में भी सुधार होगा। उन्होंने कहा कि पशुपालन का कोई भी पहलू छोटा या महत्वहीन नहीं है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा पशुधन किसानों के लिए किए जा रहे अनुसंधान, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. जतिंदर पाल सिंह गिल ने बताया कि विश्वविद्यालय में नस्ल सुधार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है और किसानों को बेहतर गुणवत्ता का जर्मप्लाज उपलब्ध कराया जा रहा है। भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक से अब तक करीब 1,200 पशुओं में सफल गर्भधारण कराया गया है, जिससे लगभग 800 बछड़ों और कट्टियों का जन्म हुआ है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय पोल्ट्री किसानों को चूजे उपलब्ध कराने के साथ पशुओं और मनुष्यों में बीमारियों की जांच के लिए विभिन्न प्रयोगशालाएं भी संचालित कर रहा है। हाल ही में मोबाइल चारा परीक्षण प्रयोगशाला शुरू की गई है, जो किसानों के घर तक पहुंचकर पशु आहार की जांच कर सकती है।
इस वर्ष मेले का मुख्य विषय पशुओं में बीमारियों की रोकथाम के लिए जैव सुरक्षा उपायों के प्रति किसानों को जागरूक करना रहा। मेले का संदेश 'जैव सुरक्षा मजबूत करें- पशु रोगों की रोकथाम करें' रखा गया।
समारोह में विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद जारी किये गये। इनमें भैंस के दूध से तैयार 'मखमली क्रीम चीज', पनीर के मट्ठे से तैयार 'रिकोटा चीज स्प्रेड', बकरी के दूध से बना 'गोअट मिल्क फेटा' तथा कम वसा और अधिक प्रोटीन वाला 'कॉटेज चीज' शामिल हैं। 'साहीवाल गाय का दूध' भी जारी किया गया। दूध में मिलावट की सामान्य जांच के लिए पेपर आधारित मिलावट जांच किट भी जारी की गयी। इसके अलावा मुख्यमंत्री पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं की जानकारी वाली पुस्तिका, 'इंडियाज मीट हेरिटेज' पुस्तक और 'एंटोफ्लिप: फ्लिप एंड लर्न' ऐप भी जारी किया गया।
विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. रविंदर सिंह ग्रेवाल ने बताया कि मेले में बकरी, सूअर, घोड़े तथा मछली पालन को लेकर किसानों में विशेष रुचि देखी गई। विश्वविद्यालय की ओर से किसानों के लिए नियमित रूप से विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।
विभिन्न विभागों ने पशुपालन प्रबंधन से संबंधित प्रकाशन और शैक्षणिक सामग्री प्रदर्शित की। किसानों को गाय, भैंस, बकरी और पोल्ट्री के उन्नत जर्मप्लाज की जानकारी दी गयी। विशेषज्ञों ने पशुपालन, पोल्ट्री और मत्स्य पालन से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए किसानों को तकनीकी परामर्श दिया। मेले में दूध जांच किट, थनैला रोग की पहचान करने वाली किट, टीट-डिप प्रक्रिया और परजीवी नियंत्रण में इस्तेमाल होने वाले एकारिसाइड के उपयोग का लाइव प्रदर्शन भी किया गया।
मत्स्य महाविद्यालय ने विभिन्न कार्प प्रजातियों, सजावटी मछलियों, एजोला, डकवीड और एकीकृत मछली-पशुधन पालन मॉडल प्रदर्शित किए। किसानों ने मत्स्य उद्यमिता, सजावटी मछली पालन, झींगा पालन और खारे पानी में मत्स्य पालन में भी रुचि दिखायी।
डेयरी एवं खाद्य विज्ञान प्रौद्योगिकी महाविद्यालय और पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग के स्टॉलों पर मीठी व नमकीन लस्सी, फ्लेवर्ड मिल्क, दही, मिठाइयां, व्हे ड्रिंक, पनीर, मिल्क केक, ढोडा बर्फी, मीट पैटीज और अन्य प्रसंस्कृत मांस उत्पाद उपलब्ध कराये गये।
पशु पोषण विभाग ने क्षेत्र विशेष के खनिज मिश्रण, सूअर खनिज मिश्रण, बाईपास फैट और यूरोमिन लिक उत्पाद प्रदर्शित किये, जिन्हें विश्वविद्यालय ने विकसित किया है और किसानों को किफायती दरों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। विश्वविद्यालय से प्रशिक्षित स्वयं सहायता समूहों ने भी मूल्यवर्धित उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री की।
मेले में विश्वविद्यालय के प्रकाशनों को भी किसानों ने पसंद किया। विस्तार शिक्षा निदेशालय ने सरल स्थानीय भाषा में तैयार पुस्तकों का प्रदर्शन किया और किसानों ने विश्वविद्यालय की मासिक पत्रिका 'वैज्ञानिक पशुपालन' के लिए पंजीकरण कराया। पशु पालन मेला 19 सितंबर को भी जारी रहेगा।
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