मुंबई , जून 20 -- महाराष्ट्र के चर्चित पवनराजे निंबालकर हत्याकांड के सभी आरोपियों को बरी किए जाने के केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार उच्च न्यायालय में अपील दायर करके चुनौती दे सकती है।

शनिवार को आए इस निर्णय में राज्य के पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद डॉ. पदमसिंह पाटिल सहित सभी नौ आरोपियों को अदालत ने दोषमुक्त करार दिया गया।

सूत्रों के अनुसार, इस फैसले पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्रियों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ चर्चा की। इस बैठक के बाद, श्री शाह ने कथित तौर पर सीबीआई को इस मामले को उच्च न्यायालय में ले जाने का निर्देश दिया। श्री शाह इस समय महाराष्ट्र के दौरे पर हैं।

अदालत के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पवनराजे निंबालकर के बेटे और सांसद ओमराजे निंबालकर ने निराशा व्यक्त की और सवाल उठाया कि अगर वास्तव में हत्या हुई थी, तो सभी आरोपी कैसे बरी हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच शुरू से ही संदेहास्पद थी और उन्होंने दोहराया कि राज्य पुलिस की जांच पर भरोसा न होने के कारण ही परिवार ने सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी।

श्री ओमराजे निंबालकर ने कहा कि उनका परिवार भी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान कई साल बर्बाद हो गए और हत्या के पीछे का सच अब भी सामने नहीं आ पाया है। उन्होंने कहा कि वे भविष्य के राजनीतिक फैसले कार्यकर्ताओं और जनता से सलाह मशविरा करने के बाद ही लेंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर उनका इरादा कोई राजनीतिक कदम उठाने का होता, तो वह साल 2022 में ही ऐसा कर चुके होते।

आरोपियों को बरी किए जाने के इस फैसले और उसके बाद जांच एजेंसी तथा निंबालकर परिवार द्वारा अपील करने के निर्णय से इस बेहद संवेदनशील राजनीतिक मामले के एक बार फिर चर्चा में बने रहने की उम्मीद है।

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