दरभंगा , अगस्त 21 -- लित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के ललित कला संकाय के विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग की ओर से शुक्रवार को संगीत मर्मज्ञ पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर एवं 'भारतरत्न' उस्ताद बिस्मिल्ला खां की पुण्यतिथि के अवसर पर व्याख्यान आयोजित किया गया।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय, प्रयागराज के संगीत विभागाध्यक्ष एवं दरभंगा घराने के विद्वान प्रो. पं. प्रेम कुमार मल्लिक ने दोनों महान संगीतज्ञों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए भारतीय संगीत के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संगीत के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ने के लिए इच्छाशक्ति, स्वस्थ प्रतिद्वंद्विता और सतत सीखने की प्रवृत्ति आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को संगीत गायन के गूढ़ तत्वों को सरल ढंग से समझाया।
पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर के योगदान की चर्चा करते हुए प्रो. मल्लिक ने कहा कि उन्होंने संगीत को गुरुकुल परंपरा से निकालकर संस्थागत स्वरूप प्रदान करने का महत्वपूर्ण कार्य किया, जिससे संगीत शिक्षा को व्यापक स्तर पर सीखना और समझना आसान हुआ।
विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. पुष्कर कुमार झा ने कहा कि पंडित पलुस्कर ने संगीत शिक्षा को परिमार्जित करने के साथ ही स्वरलिपि पद्धति को विकसित करने तथा बंदिशों में भक्तिपरक शब्दावली को महत्व देने का कार्य किया।
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