रांची , जनवरी 29 -- झारखंड के राज्यपाल-सह-राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य का संबंध अत्यंत गहरा एवं संवेदनशील है।

श्री गंगवार ने आज जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज के तत्वावधान में एक्सएलआरआई जमशेदपुर में "एनवायरमेंटल मुटाजेनसीस एंड इपीजीनोमिक्स इन रिलेशन टू ह्यूमन हेल्थ" विषय पर आयोजित तीन दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ ईएमसीआई (एनवायरमेंटल मुटाजेन सोसाइटी ऑफ़ इंडिया) के उद्घाटन करते हुए कहा कि आज औद्योगिकीकरण, शहरीकरण, प्रदूषण एवं बदलती जीवन-शैली के कारण मानव स्वास्थ्य से जुड़ी अनेक नई चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही हैं। हवा, पानी, मिट्टी और भोजन के माध्यम से हो रहे प्रदूषण का मानव शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिससे आनुवांशिक एवं स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएँ बढ़ रही हैं।

श्री गंगवार ने आशा व्यक्त की कि यह सम्मेलन केवल समस्याओं तक सीमित न रहकर उनके व्यावहारिक और प्रभावी समाधानों पर भी गंभीर विमर्श करेगा। ऐसे सम्मेलनों के निष्कर्ष समाज के लिए उपयोगी और व्यावहारिक होने चाहिए। साथ ही उन्होंने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से अपने ज्ञान और अनुसंधान को समाज के व्यापक हित से जोड़ने का आह्वान किया।

श्री गंगवार ने कहा कि झारखण्ड के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में वे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता एवं शोध के उन्नत के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

श्री गंगवार ने कहा कि वे चाहते हैं कि झारखण्ड के विश्वविद्यालय देश के अग्रणी संस्थानों में स्थान बनाएँ और देशभर के विद्यार्थी यहाँ अध्ययन के लिए उत्सुक हों। उन्होंने कहा कि आज विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें समाज की समस्याओं के समाधान का केंद्र बनना चाहिए। शोध, नवाचार और बहुविषयी अध्ययन को प्रोत्साहित कर ही पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं मानव कल्याण से जुड़े विषयों का प्रभावी समाधान संभव है।

राज्यपाल श्री गंगवार ने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में हमारा देश 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान, नमामि गंगे और पर्यावरण संरक्षण जैसे अभियानों के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।

श्री गंगवार ने कहा कि झारखण्ड प्राकृतिक संपदा, जैव विविधता और युवा प्रतिभा से समृद्ध राज्य है। यहाँ प्रकृति और मानव का संबंध सदियों पुराना है। उन्होंने युवा शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों से जिज्ञासा, अनुशासन और सामाजिक संवेदनशीलता के साथ शोध कार्य करने का आह्वान किया तथा आशा व्यक्त की कि आगामी तीन दिनों में होने वाली चर्चाएँ बौद्धिक, वैज्ञानिक एवं सामाजिक दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध होंगी।

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