भुवनेश्वर , अगस्त 11 -- ओडिशा में पर्यावरण कार्यकर्ताओं और जनांदोलनों के नेताओं ने पूर्वी घाट में अंधाधुंध बॉक्साइट खनन पट्टों के आवंटन के खिलाफ कड़ी आपत्ति जताते हुए चेतावनी दी है कि बड़े पैमाने पर होने वाले इस खनन से जंगल नष्ट होने के साथ ही जल स्रोत सूख सकते हैं और हजारों आदिवासी तथा ग्रामीण परिवारों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है।

जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (एनएपीएम) और सेंटर फॉर क्लाइमेट जस्टिस ने पहले से दी गयी खनन पट्टों को तुरंत वापस लेने और राज्यभर में प्रस्तावित बॉक्साइट खदानों के लिए नीलामी की कार्रवाई रद्द करने की मांग की।

जाने-माने पर्यावरणविद प्रफुल्ल सामंतरा, जन आंदोलन के नेता नरेंद्र महंती और गांधीवादी नेता डॉ. बिस्वजीत ने यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित हुए कहा कि बॉक्साइट वाले पहाड़ सिर्फ खनिज भंडार नहीं हैं बल्कि पानी के जरूरी कुदरती भंडार हैं जो नदियों, झरनों, खेती और इंसानी बस्तियों को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि बॉक्साइट वाले पहाड़ जमीन के नीचे बारिश का पानी सोखते हैं और उसे रोकते हैं तथा मानसून के बाद धीरे-धीरे झरनों के जरिए उसे छोड़ देते हैं। ये हमेशा रहने वाले झरने नदियों और पानी की दूसरी जगहों को पानी देते हैं, जिससे ऐसे पहाड़ कुदरती 'पानी के टावर' बन जाते हैं।

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