नयी दिल्ली , फरवरी 24 -- उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने पर्यटन को संस्कृतियों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बताते हुए इसके अनुभव को बेहतर बनाने के लिए एआई जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के एकीकरण पर जोर दिया लेकिन कहा कि पर्यावरणीय लक्ष्यों के अनुरूप ही पर्यटन का विकास होना चाहिए।

श्री राधाकृष्णन ने मंगलवार को यहां अमेरिका-भारत सहयोग फोरम द्वारा आयोजित 'टूरिज्म लीडरशिप समिट 2026' को संबोधित किया और सतत समावेशी विकास पर बल देते हुए जलवायु के प्रति सजग बुनियादी ढांचे, समुदाय-आधारित मॉडलों और आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए एआई जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के एकीकरण का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने पर्यटन को आर्थिक अवसरों और सौम्य कूटनीति का एक शक्तिशाली सेतु बताया और कहा कि यह युवाओं को आत्मविश्वास और प्रगतिशील भारत की आकांक्षाओं का प्रतीक है।

उन्होंने भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति को इसकी सबसे बड़ी संपत्ति बताया और कहा कि विकसित तथा आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना युवा नागरिकों से नवाचार, ईमानदारी और उद्यमशीलता के साथ योगदान करने का आह्वान करती है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता हमारी क्षमताओं में विश्वास और हमारी विरासत पर गर्व को दर्शाती है।

उपराष्ट्रपति ने पहाड़ी क्षेत्रों की संवेदनशीलता का उल्लेख करते हुए आपदा से निपटने की बेहतर तैयारियों, उन्नत बुनियादी ढांचे और समन्वित प्रयासों के महत्व पर बल दिया, जिनमें आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन जैसी पहलें शामिल हैं। उन्होंने दार्जिलिंग चाय की वैश्विक प्रतिष्ठा को भी स्वीकार किया और मूल्यवर्धन एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित किया। खेलों के संदर्भ में, उन्होंने जमीनी स्तर की प्रतिभाओं के पोषण के लिए एकीकृत बुनियादी ढांचे और संस्थागत समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने युवाओं से बदलते विश्व के अवसरों को अपनाते हुए अपनी विरासत से जुड़े रहने का आग्रह किया और विश्वास व्यक्त किया कि वे राष्ट्र निर्माण और विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण में सार्थक योगदान देंगे।

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