कोंडागांव, अप्रैल 06 -- छत्तीसगढ़ में कोंडागांव जिले का मसोरा जलाशय इन दिनों प्रकृति और पक्षी प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। यहां बड़ी संख्या में लेसर व्हिस्लिंग डक देखी जा रही हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'सिटी बजाने वाली बत्तख' या 'छोटी सिल्ही' के नाम से जाना जाता है।
भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण-पूर्व एशिया में पाई जाने वाली यह छोटी भूरे रंग की बत्तख इस जलाशय की सुंदरता को और बढ़ा रही है।
राष्ट्रीय राजमार्ग -30 से 900 मीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत मसोरा के जामकोट जलाशय को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है। इसी कड़ी में कोंडागांव विधायक लता उसेंडी और कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना के संयुक्त प्रयासों से यहां 'वन भोज' कार्यक्रम की शुरुआत की जा रही है।
इस पहल के तहत जिला प्रशासन, ग्रामीणों, स्व-सहायता समूह की महिलाओं तथा वन, खनिज एवं प्रबंधन समिति के सहयोग से जलाशय के आसपास विभिन्न सुविधाएं विकसित की जाएगी, जिससे यहां आने वाले पर्यटक प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्वादिष्ट स्थानीय भोजन का आनंद ले सकेंगे। साथ ही, नाव विहार की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे पर्यटक अपने परिवार और मित्रों के साथ सुकून भरे पल बिता सकेंगे।
मसोरा के विकास की रूपरेखा राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30' पर टिकी है, जिसे जून 2025 में मंजूरी दी गई थी। इस नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य के ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देना तथा स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना है। सरकार का लक्ष्य इस नीति के तहत 500 नए होमस्टे विकसित करने का है।
यह नीति स्थानीय लोगों को पर्यटन उद्योग से जोड़ने का एक ठोस प्रयास है, जिसके तहत कई प्रकार की सहायता का प्रावधान किया गया है। आवेदकों को घर को होम स्टे में बदलने के लिए 10 लाख रुपये तक का अनुदान प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा, नए होमस्टे के निर्माण हेतु 5 लाख रुपये तक तथा पूर्व से संचालित होमस्टे में सुधार हेतु 3 लाख रुपये तक की सहायता भी प्रदाय की जाएगी। सरकार होमस्टे संचालकों को मेहमानों की मेजबानी करने का प्रशिक्षण भी देगी। नीति के तहत पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एक सिंगल-विंडो सिस्टम भी उपलब्ध कराया गया है।
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