पटना , अप्रैल 19 -- राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने रविवार को कहा कि परिसीमन एवं महिला आरक्षण विधेयक के खिलाफ महागठबंधन का लोकतंत्र विरोधी चेहरा उजागर हो गया है। श्री कुशवाहा ने आज बयान जारी कर कहा कि 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक का गिरना भारत के राजनीतिक इतिहास में एक काला दिवस के रुप में अंकित हो गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक से लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभा में महिलाओं और युवाओं के लिए अवसर सृजित करने का महत्वपूर्ण प्रयास किया था।

श्री कुशवाहा ने कहा कि उनकी पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके लिए आभार व्यक्त करती है कि उन्होंने ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक को सदन में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि परिसीमन विधेयक सीधे तौर पर लोकतंत्र की नींव " समान प्रतिनिधित्व" के सिद्धांत से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों से देश की जनगणना में भारी वृद्धि हुई है जिससे कई निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या इतनी अधिक हो गई है कि एक प्रतिनिधि के लिए सभी की समस्या का निवारण करना कठिन है। परिसीमन से सीटों का पुनर्गठन होना था जिससे हर नागरिक की आवाज को विधायिका (लोकसभा और विधानसभा) में बराबर का अधिकार मिलता, लेकिन महागठबंधन के कुटिल चाल के कारण महिलाओं, युवाओं और सभी नागरिकों का अधिकार उनसे छिन गया, जिसकी वह कड़ी निंदा करते हैं।

राज्यसभा सांसद श्री कुशवाहा ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 82 के अनुरुप परिसीमन विधेयक से संपूर्ण देश में लोकसभा और राज्यों की विधानसभा में सीटों की संख्या में डेढ गुणा वृद्धि होती। उन्होंने कहा कि बिहार में भी लोकसभा के सीटों की संख्या 40 से बढ़कर 60 और विधानसभा में 243 से बढ़कर 365 सीट हो जाती, जिसका सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक लाभ बिहार के लोगों को समग्र रूप से मिलता, वहीं महिला आरक्षण विधेयक से भी एक तिहाई स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित होता जो उनके लिए नए अवसर सृजित करता।

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