बैतूल , सितंबर 19 -- नीम करोली बाबा के जीवन और चमत्कारों पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' में कई तथ्यों को नाटकीय रूप दिया गया है। फिल्म निर्माण से पहले बाबा के परिवार से चर्चा की जाती तो इसमें अधिक सत्यता रहती। इसके बावजूद फिल्म की सफलता बाबा का ही चमत्कार है। यह बात नीम करोली बाबा के पौत्र एवं भोपाल निवासी डॉ. धनंजय शर्मा ने गुरुवार शाम बैतूल के सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा में कही।

डॉ. शर्मा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर बैतूल में फिल्म के नि:शुल्क प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि वह 1957 से 1973 तक बाबा के साथ रहे। उनका नाम धनंजय भी बाबा ने रखा था और बचपन में ही उनके डॉक्टर बनने की बात कही थी।

उन्होंने कहा कि फिल्म में बाबा को 'सीताराम' बोलते, कमंडल और लाठी रखते तथा दूसरे लोगों के घर रहने वाला दिखाया गया है, जबकि वे 'राम-राम' बोलते थे। वे कमंडल नहीं रखते थे और लाठी के सहारे नहीं चलते थे। बाबा ने घर नहीं छोड़ा था, बल्कि भक्तों के आग्रह पर कुछ समय के लिए उनके घर जाते थे।

डॉ. शर्मा के अनुसार बाबा के पिता और दादा के पास आठ गांवों की जमींदारी थी और वे करीब 30 वर्ष तक निर्विरोध ग्राम प्रधान रहे। उन्होंने कभी भगवा वस्त्र नहीं पहने, चार पहिया वाहन नहीं खरीदा, गुरुदीक्षा नहीं ली और न ही किसी को उत्तराधिकारी बनाया।

वे भक्तों को हनुमान चालीसा और सुंदरकांड के माध्यम से समाधान बताते थे। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर बाबा से जुड़े कई असत्य तथ्य प्रसारित हो रहे हैं। फिल्म के अगले भाग में परिवार से चर्चा कर वास्तविक तथ्यों को शामिल किया जा सकता है।

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