रांची , जुलाई 06 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने परिवहन विभाग में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
श्री मरांडी ने कहा कि ट्रेजरी स्कैम और फर्जी बैंक गारंटी घोटाले पर उठे सवालों का जवाब अभी तक जनता को नहीं मिला है। इसी बीच परिवहन विभाग से जुड़ा एक और मामला सामने आया है, जिस पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
श्री मरांडी ने आरोप लगाया कि झारखंड में ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी कार्ड की प्रिंटिंग का कार्य करने वाली गुरुग्राम स्थित रोजमार्टा कंपनी के साथ राज्य सरकार का अनुबंध 22 फरवरी 2026 को समाप्त हो गया था। इसके बाद कंपनी को केवल 22 मार्च 2026 तक का विस्तार दिया गया। उन्होंने दावा किया कि इसके बावजूद पिछले लगभग तीन महीनों से बिना किसी वैध अनुबंध और अधिकृत विस्तार के कंपनी कार्य कर रही है तथा परिवहन विभाग द्वारा उसे करोड़ों रुपये का भुगतान भी किया जा रहा है।
श्री मरांडी ने सवाल उठाया कि बिना वैध अनुबंध के भुगतान किस नियम के तहत किए जा रहे हैं। उन्होंने पूछा कि इसकी अनुमति किस अधिकारी ने दी, क्या वित्त विभाग को इसकी जानकारी है और क्या इस संबंध में सक्षम प्राधिकारी अथवा मंत्रिमंडल से स्वीकृति ली गई थी।
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूछा कि यदि किसी सामान्य ठेकेदार का अनुबंध समाप्त हो जाए तो क्या उसे बिना एग्रीमेंट के सरकारी कार्य करने दिया जाएगा। यदि नहीं, तो रोजमार्टा कंपनी के लिए अलग व्यवस्था क्यों अपनाई गई और उसे विशेष संरक्षण किसके निर्देश पर दिया जा रहा है।
श्री मरांडी ने कहा कि झारखंड की जनता जानना चाहती है कि इस पूरे मामले की जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने सरकार से निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या इस मामले में भी ट्रेजरी स्कैम की तरह केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर वास्तविक जिम्मेदारों को बचाने का प्रयास किया जाएगा।
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