नयी दिल्ली , अगस्त 19 -- रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल मार्गों के विद्युतीकरण और रेल पटरियों को उन्नत बनाने के काम में पिछले 10-12 वर्ष में हुई प्रगति को अभी " शुरुआत" बताते हुए बुधवार को कहा कि मोदी सरकार परिवहन क्षेत्र में दशकों की उपेक्षा और अड़चनों को दूर करने में लगी है। श्री वैष्णव के पास सूचना प्रसारण और इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालयों की भी जिम्मेदारी है।

वह यहां मंत्रिमंडल और आंतरिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक के निर्णयों की जानकारी दे रहे थे।

श्री वैष्णव ने इस अवसर पर संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा, ' परिवहन क्षेत्र में साठ साल की उपेक्षा को 12 साल में दूर करने का प्रयास किया गया है।" उन्होंने रेलवे को जल-मार्ग के बाद परिवहन का सबसे किफायती जरिया बताते हुए कहा कि इन बारह वर्षों में रेलवे के 81 प्रतिशत ट्रैक (पटरियों) का उन्नयन और रेल नेटवर्क का करीब करीब शत प्रतिशत का विद्युतीकरण किया जा चुका है।

रेल मंत्री ने कहा, " अभी तो यह शुरुआत है। आगे विकास का एक नया ही स्तर होगा।"उन्होंने कहा कि रेल मार्गों के उन्नयन से ट्रेनों की औसत गति बढ़ी है। हर वर्ष तीन हजार किलोमीटर से चार हजार किलोमीटर नयी रेल पटरियां बिछाई जा रही हैं। पटरियों के उन्नयन की देन है कि रेलवे के लिए पिछले साल विभिन्न अवसरों पर कुल मिला कर 75,000 विशेष ट्रेनों का परिचालन करना संभव हुआ।

उन्होंने कहा कि देश में परिवहन क्षेत्र में बहुत अधिक अड़चने थीं। इन अड़चनों को तेजी से दूर करने का प्रयास है।

श्री वैष्णव ने कहा कि भारत में परिवहन सेवाओं की मांग में साल-दर -साल औसतन 10 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। रेलवे, पोत परिवहन , ट्रक ट्रांसपोर्ट और हवाई परिवहन सभी के लिए अवसरों का विस्तार हो रहा है।

उन्होंने कहा कि परिवहन की विभिन्न प्रणालियों में सबसे कम खर्च जल-मार्ग पर आता है ।उसके बाद किफायत के मामले में रेलवे का स्थान है। इसी कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 के बाद रेलवे में बड़े निवेश के निर्णय किये हैं। इससे लॉजिस्टिक्स की लागत कम होती है तथा पर्यावरण का नुकसान भी कम होता है। उन्होंने कहा कि सरकार अध्ययन के आधार पर पुलों के डिजाइन पर विशेष ध्यान दे रही है ताकि वे मजबूत और अच्छे हो। यह काम वाजपेयी सरकार के समय से ही किया जा रहा है।

मंत्रिमंडल और सीसीईए की आज की बैठक में पश्चिम बंगाल,ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में रेलवे अवसंरचना के विस्तार और बिहार में एनएच-22 के मुजफ्फरपुर-सीतीमढ़ी-सोनबरसा खंड को उन्नत कर चार लेन का बनाने की परियोजनाओं को मंजूरी दी गयी ।

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