देहरादून , फरवरी 18 -- उत्तराखंड के देहरादून स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के सभागार में बुधवार को आयोजित कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रसिद्ध लेखक, दार्शनिक और प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक आचार्य प्रशांत ने शिवत्व को जीवन की गहराइयों से जोड़ते हुए कहा कि महाशिवरात्रि केवल अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि जागरण की बात है जो मनुष्य को अपने भीतर झांकने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि परिणाम की परवाह किए बिना भी बेहतर जीवन जिया जाना सम्भव है।

महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में आध्यात्मिकता, आत्म मंथन और संवाद की शुरुआत प्रतीकात्मक नाट्य प्रस्तुति से हुई। अपने संबोधन में आचार्य प्रशांत ने कहा कि शिव को केवल मूर्ति या रूप में सीमित कर देना उनकी व्यापकता को संकुचित करना है। उनके अनुसार शिवत्व चेतना की पराकाष्ठा वह स्थिति है जहाँ व्यक्ति अपने अहंकार को पहचान लेता है। उन्होंने कहा कि अहंकार का विलोप ही शिवत्व है। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक मनुष्य अपने दुखों का कारण बाहरी परिस्थितियों में ढूंढता रहेगा, तब तक वास्तविक मुक्ति संभव नहीं। समस्या बाहर नहीं, दृष्टि में है।

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